एसबीआई के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने अनिल अंबानी और आरकॉम खातों को ‘धोखाधड़ी’ घोषित कियाBy Admin Sun, 24 August 2025 06:52 AM









मुंबई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के खातों को ‘धोखाधड़ी’ घोषित किए जाने के कुछ ही दिनों बाद अब बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने भी कंपनी, उसके प्रमोटर अनिल अंबानी और रिलायंस टेलीकॉम के लोन खातों को ‘फ्रॉड’ की श्रेणी में डाल दिया है। इसकी जानकारी कंपनी ने रविवार को शेयर बाज़ार को दी।

बैंक ने फंड्स के डायवर्ज़न और लोन की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। कंपनी द्वारा दाखिल स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, आरकॉम को बीओआई का एक पत्र 8 अगस्त को जारी हुआ और 22 अगस्त को प्राप्त हुआ।

नोटिस में बीओआई ने कहा कि आरकॉम, अनिल धीरजलाल अंबानी और मंजरी आशीक कक्कर के लोन खातों को 724.78 करोड़ रुपये के बकाए पर ‘फ्रॉड’ घोषित किया गया है।

बैंक ने बताया कि यह खाता जून 2017 में एनपीए (गैर-निष्पादित आस्ति) में बदल गया था और लगातार प्रयासों के बावजूद उधारकर्ताओं व गारंटरों ने बकाया चुकाने से इनकार कर दिया।

कंपनी की फाइलिंग में साझा किए गए बीओआई के पत्र में कहा गया, “30.06.2017 को उधारकर्ता का खाता 724.78 करोड़ रुपये की बकाया राशि के साथ एनपीए में बदल गया। बैंक ने उधारकर्ताओं और गारंटरों से बकाया वसूली के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन उन्होंने चुकौती से इनकार कर दिया।”

बीओआई ने इसी तरह का नोटिस रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को भी जारी किया और इसे ‘फ्रॉड’ घोषित किया, साथ ही इसके निदेशकों ग्रेस थॉमस और सतीश सेठ के नाम भी शामिल किए। यह मामला 51.77 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट से जुड़ा है। इसमें गौतम भैलाल दोशी, दगदुलाल कस्तुरचंद जैन और प्रकाश शेनॉय के नाम भी सामने आए हैं।

आरकॉम और उसकी सहायक कंपनियों ने विभिन्न बैंकों से कुल 31,580 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

इस बीच, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच तेज़ कर दी है। शनिवार को अधिकारियों ने मुंबई में दो स्थानों पर तलाशी ली, जिनमें अनिल अंबानी का आवास और आरकॉम का दफ्तर शामिल है।

यह कार्रवाई 21 अगस्त को एसबीआई की शिकायत पर दर्ज किए गए 2,929.05 करोड़ रुपये के नए बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है। शिकायत में आरकॉम, अनिल अंबानी, अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर बैंक से लोन लेने का आरोप लगाया गया है।

जांचकर्ताओं का दावा है कि लिए गए फंड्स को कई चैनलों के ज़रिए डायवर्ट किया गया, जैसे इंटर-कंपनी लोन ट्रांजैक्शन और इंटर-कारपोरेट डिपॉज़िट्स।

सीबीआई ने कुछ अनियमितताओं की भी ओर इशारा किया है, जैसे — सेल्स इनवॉइस फाइनेंसिंग का दुरुपयोग, आरकॉम बिल्स को रिलायंस इंफ्राटेल के माध्यम से डिस्काउंट कराना, समूह की अन्य कंपनियों के जरिए फंड्स रूट करना और नेटिज़न इंजीनियरिंग प्रा. लि. (रिलायंस एडीए ग्रुप की एक अन्य कंपनी) को दिए गए कैपिटल एडवांस को राइट-ऑफ करना।

हालांकि, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और वे इसका पूरी तरह से बचाव करेंगे।

 

With inputs from IANS

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