बजट 2026: संयम के साथ सुधारों की रफ्तार जारी रहने की उम्मीद: रिपोर्टBy Admin Tue, 20 January 2026 06:43 AM

नई दिल्ली- यूनियन बजट 2026-27 में सुधारों की लहर प्रमुखता से देखने को मिल सकती है। एचएसबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में किए गए कई अहम ऐलानों को देखते हुए सरकार आगे भी सुधारों को आगे बढ़ाने के मूड में है।

केंद्र सरकार का बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, जिसके तुरंत बाद 6 फरवरी को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति बैठक होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारा मानना है कि इस दौर में सरकार दो प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करेगी—संयम और सुधार।”

एचएसबीसी को उम्मीद है कि सरकार वित्त वर्ष 2026 में अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा कर लेगी, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.4 प्रतिशत तय किया गया है। कर दरों में कटौती के कारण राजस्व में आई कमी की भरपाई आंशिक रूप से RBI और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) से मिलने वाले मजबूत डिविडेंड तथा आंशिक रूप से कम चालू व्यय से की जा सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया, “हमें उम्मीद है कि योजनाओं में कटौती से सरकार को वित्त वर्ष 2027 में खर्च घटाने में मदद मिलेगी और हम GDP के 4.2 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में शुद्ध उधारी 11.5 लाख करोड़ रुपये पर अपरिवर्तित रह सकती है। हालांकि, उच्च रिडेम्प्शन देनदारियों (कुछ स्विच की धारणा के बावजूद) के चलते सकल उधारी बढ़कर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

इसके बावजूद, उधारी में वृद्धि नाममात्र GDP वृद्धि से कम रहने की संभावना है, जिससे यह प्रबंधनीय बनी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया कि सीमित राजकोषीय समेकन और RBI डिविडेंड से प्राप्त ऊंची रसीदों के चलते राजकोषीय प्रोत्साहन लगभग तटस्थ रह सकता है।

यह समेकन स्तर वित्त वर्ष 2031 तक केंद्र सरकार के सार्वजनिक ऋण लक्ष्य को हासिल करने की सही दिशा में माना गया है। हालांकि, राज्य सरकारों के सार्वजनिक ऋण अनुपात में आने वाले कुछ वर्षों में वृद्धि देखी जा सकती है, क्योंकि उनके पास केंद्र जैसी समेकन की स्पष्ट राह नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्यों को शामिल करने के बाद भी कुल सकल बाजार उधारी की वृद्धि नाममात्र GDP वृद्धि से थोड़ी कम रह सकती है। यह स्थिति वित्त वर्ष 2026 से बेहतर होगी, जब उधारी की वृद्धि NGDP से कहीं अधिक थी।

घरेलू मोर्चे पर रिपोर्ट का अनुमान है कि केंद्र और राज्यों द्वारा विनियमन हटाने (डीरिगुलेशन) की प्रक्रिया जारी रहेगी, छोटे उद्योगों के लिए मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स बढ़ेंगे, राज्यों को दिए जाने वाले पूंजीगत ऋणों के पक्ष में कैपेक्स का विविधीकरण होगा और सब्सिडी व केंद्र प्रायोजित योजनाओं में कुछ युक्तिकरण किया जाएगा।

वैश्विक मोर्चे पर रिपोर्ट में कस्टम ड्यूटी के युक्तिकरण, गैर-शुल्क बाधाओं को धीरे-धीरे हटाने और विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए अधिक खुलापन अपनाने की संभावना जताई गई है।

 

With inputs from IANS