रिकॉर्ड स्तरों से मुनाफावसूली के बाद सोने-चांदी की कीमतों में गिरावटBy Admin Fri, 30 January 2026 07:55 AM

मुंबई, 30 जनवरी:
पिछले सत्र में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने और अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने से दोनों कीमती धातुओं पर दबाव देखने को मिला।

एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना इंट्राडे कारोबार में सुबह करीब 10 बजे 1.03 प्रतिशत गिरकर 10 ग्राम पर 1,67,656 रुपये पर आ गया। वहीं, एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,86,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।

पिछले सत्र में चांदी की कीमत एमसीएक्स पर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और भाव 3,75,900 रुपये तक फिसल गए थे, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह मौजूदा स्तर पर आ गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 5,156.64 डॉलर प्रति औंस तक आ गई। बाद में इसमें सुधार हुआ और भाव 5,346.42 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए। इसके बावजूद, इस साल अब तक सोने की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई है। वहीं, साल-दर-साल आधार पर चांदी की कीमतों में लगभग 53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक संरचना अब भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन हालिया तेज उछाल के बाद बाजार में तेज इंट्राडे उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। यह स्थिति अल्पकालिक ओवरहीटिंग और रणनीतिक मुनाफावसूली को दर्शाती है।

विश्लेषकों के अनुसार, कीमती धातुएं अभी भी मजबूत अपट्रेंड में हैं, लेकिन हालिया तेजी के कारण कीमतें ओवरबॉट स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे आक्रामक मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। साथ ही, संरचनात्मक आपूर्ति घाटा और औद्योगिक मांग अब भी तेजी के पक्ष को समर्थन दे रही है।

बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि चांदी के लिए प्रमुख समर्थन स्तर 3,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में विराम के संकेत मिलने के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती देखी गई है। इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ विकल्पों पर विचार किए जाने की खबरों के बीच भू-राजनीतिक तनाव भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं।

व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को चांदी में मुनाफावसूली करने और अपने निवेश को विविधीकृत भारतीय इक्विटी फंड्स या ब्लू-चिप शेयरों में पुनर्संतुलित करने की सलाह दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को कीमती धातुओं में अपने आवंटन को सुरक्षित-निवेश स्तर तक सीमित करना चाहिए और आगे की तेजी के पीछे भागने से बचना चाहिए। मौजूदा गोल्ड-टू-सिल्वर अनुपात घटकर लगभग 46:1 पर आ गया है, जबकि पिछले 10 वर्षों का औसत करीब 80:1 रहा है।