
मुंबई। अमेरिका के शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) में मार्जिन आवश्यकताओं में बढ़ोतरी लागू होने से पहले सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा।
एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव इंट्रा-डे कारोबार में 1.77 प्रतिशत गिरकर 1,45,132 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी के वायदा भाव 6.88 प्रतिशत टूटकर 2,47,386 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए।
विश्लेषकों के अनुसार, सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से फिसलना तब शुरू हुए, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को अगला अमेरिकी फेड चेयरमैन चुना। निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही, क्योंकि वार्श को ब्याज दरों के मामले में पहले के चेयरमैनों की तुलना में अधिक सख्त माना जाता है।
इस गिरावट को मजबूत अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिका के उत्साहजनक महंगाई आंकड़ों (पीपीआई और कोर पीपीआई) से भी समर्थन मिला। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के वीपी (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किए जाने से घरेलू बुलियन प्रीमियम पर भी दबाव पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चांदी को 68 डॉलर के आसपास सपोर्ट मिल सकता है, जबकि इस सप्ताह सोना 4,510 डॉलर के स्तर पर टिक सकता है। सोमवार को एशियाई कारोबार के दौरान शुरुआती सत्र में करीब 4 प्रतिशत गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड में अच्छी रिकवरी देखी गई।
विश्लेषकों के मुताबिक, एमसीएक्स पर सोने को 1,39,650 से 1,36,310 रुपये के दायरे में सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 1,48,850 और 1,50,950 रुपये पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए 2,48,810 और 2,37,170 रुपये सपोर्ट लेवल हैं, जबकि 2,78,810 और 2,95,470 रुपये रेजिस्टेंस के स्तर हैं।
उनका कहना है कि कॉमेक्स गोल्ड का व्यापक रुझान अब भी सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि हालिया तेज उछाल के कारण तकनीकी संकेतक ओवरबॉट जोन में पहुंच गए थे, जिससे मुनाफावसूली और ऊंचे स्तरों से हल्का करेक्शन देखने को मिला।
चांदी में संरचनात्मक सप्लाई की कमी और स्थिर औद्योगिक मांग अब भी तेजी का आधार बने हुए हैं। वहीं सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद और वैश्विक मौद्रिक नीतियों में नरमी की उम्मीदें सोने की कीमतों को सहारा दे रही हैं।
व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे कीमती धातुओं में निवेश को सुरक्षित-निवेश स्तर तक सीमित करें, खासतौर पर चांदी में, क्योंकि इसका मूल्यांकन ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ चुका है।
With inputs from IANS