
नई दिल्ली- एक नई SBI Research रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन द्वारा विभिन्न देशों से वसूले गए टैरिफ की राशि 160–175 अरब डॉलर के बीच है (जिसमें सबसे अधिक भुगतान चीनी कंपनियों ने किया है)। इन टैरिफ का रिफंड करना भले ही जटिल और अव्यवस्थित साबित हो, लेकिन यह भविष्य में टैरिफ ढांचे को लागू करने के लिए एक मनोवैज्ञानिक बाधा भी बन सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि Donald Trump ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 का हवाला देते हुए वैश्विक टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। यह कदम उस फैसले के एक दिन बाद उठाया गया, जिसमें US Supreme Court ने उनके पहले लगाए गए कई टैरिफ को खारिज कर दिया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत द्वारा टैरिफ ढांचे को रद्द किए जाने से आगे चलकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। ऐसे में विभिन्न देशों को इस अंतरिम अवधि में रणनीतिक रूप से खुद को स्थापित करने के लिए असामान्य और जटिल वार्ताओं का सहारा लेना पड़ सकता है, क्योंकि अंतिम निर्णय की शक्ति एक संतुलित अमेरिकी कांग्रेस के हाथ में रहती है।
रिपोर्ट में कहा गया, “प्रभावी टैरिफ संरचना को लेकर अंतर-सरकारी संधियों और कानूनी इकाइयों के बीच तालमेल न बन पाने की स्थिति में हालात ‘अव्यवस्था’ या ‘अराजकता’ जैसे हो सकते हैं।”
ट्रेड एक्ट के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति भुगतान संतुलन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अस्थायी आयात अधिभार (अधिकतम 15 प्रतिशत तक) या कोटा लगा सकते हैं। यह व्यवस्था अधिकतम 150 दिनों तक लागू रहती है, जब तक कि कांग्रेस इसे कानून के जरिए आगे न बढ़ा दे।
नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ छूट भी दी गई है। इसमें कनाडा और मेक्सिको से आने वाले वे सामान शामिल हैं जो USMCA के मानकों का पालन करते हैं, साथ ही पहले से लागू राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े टैरिफ भी इससे बाहर रखे गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी अनुमान जताया गया कि इस अवधि के दौरान प्रशासन जांच पूरी कर धारा 301 और 232 के तहत नए टैरिफ लागू कर सकता है। चूंकि धारा 232 को समाप्त नहीं किया गया है, इसलिए भारतीय कंपनियों सहित वैश्विक उद्योगों को स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल और तांबे जैसे उत्पादों पर इन टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न देशों के बीच हुए व्यापार समझौतों की व्याख्या निजी और स्वतंत्र कानूनी इकाइयों के स्तर पर कैसे की जाती है, और द्विपक्षीय संबंधों में हो रहे बदलाव इस व्यापारिक परिदृश्य को किस तरह प्रभावित करते हैं।
With inputs from IANS