
मुंबई: India और European Union ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने के बाद एक-दूसरे को पांच वर्षों के लिए ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) का दर्जा देने पर सहमति जताई है।
इस कदम का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच सेवाओं के व्यापार में निष्पक्ष और समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। MFN प्रावधान के तहत भारत और यूरोपीय संघ के सेवा क्षेत्र और सेवा प्रदाताओं को कम-से-कम उतना ही अनुकूल व्यवहार मिलेगा, जितना किसी अन्य देश को दिया जाता है।
इसका मतलब यह है कि दोनों में से कोई भी पक्ष किसी तीसरे देश को बेहतर सुविधाएं नहीं दे सकेगा, जब तक वही लाभ दूसरे पक्ष को भी न दिए जाएं—हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें और सीमाएं तय की गई हैं।
हालांकि, यह MFN व्यवस्था कर संधियों (टैक्स ट्रीटी), मानकों या अनुमोदनों की पारस्परिक मान्यता और विवाद निपटान प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, समझौते में सीमा क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उत्पादित और उपभोग की जाने वाली सेवाओं के लिए विशेष रियायतें देने का भी प्रावधान है।
यह प्रावधान FTA के ‘सेवाओं में व्यापार’ अध्याय का हिस्सा है, जिसका पाठ 27 जनवरी को सार्वजनिक किया गया था। समझौते के तहत चौथे वर्ष में एक संयुक्त समिति द्वारा समीक्षा की जाएगी।
इस समीक्षा में यूरोपीय संघ में भारतीय छात्रों के प्रवेश और ठहराव, उनके कार्य अधिकारों और सेवा प्रदाताओं की अस्थायी आवाजाही से जुड़े नियमों जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। समीक्षा के आधार पर संयुक्त समिति यह तय करेगी कि MFN व्यवस्था को शुरुआती पांच वर्षों के बाद आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
यदि किसी भी पक्ष को लगे कि परिस्थितियां उसके हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं, तो वह समीक्षा की मांग कर सकता है। अगर समिति इस व्यवस्था को आगे न बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो MFN दर्जा समाप्त हो जाएगा, हालांकि पहले से दिए गए लाभ बने रहेंगे।
भारत और यूरोपीय संघ ने पिछले महीने लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया था। इस समझौते का उद्देश्य शुल्क में कमी, बाजार तक बेहतर पहुंच और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार व निवेश को बढ़ावा देना है।
With inputs from IANS