
मुंबई — भारतीय शेयर बाजार ने लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ समाप्त किया, जहां प्रमुख सूचकांक लगभग 0.5% लुढ़क गए। बाजार में यह कमजोरी वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू चिंताओं के मिश्रित प्रभाव के कारण आई।
विश्लेषकों का कहना है कि अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में मुख्य कारक होंगे:
Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति का निर्णय
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता geopolitical तनाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ वृद्धि
छोटे सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही, क्योंकि अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने निवेशकों के भरोसे को झटका दिया और व्यापक बिकवाली को बढ़ावा दिया।
मध्य सप्ताह में बाजार ने थोड़ी रिकवरी दिखाई, जब तत्काल तनाव कम होने और तेल की कीमतों में कुछ ठहराव देखा गया।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी, मुद्रास्फीति की चिंता और रुपए की कमजोरी के कारण अस्थिरता बनी रही। सप्ताह के अंत में, Nifty 22,713.10 पर बंद हुआ, जबकि Sensex 73,319.55 पर बंद हुआ।
तकनीकी दृष्टिकोण से विश्लेषक मानते हैं कि 22,150–21,900 का क्षेत्र महत्वपूर्ण समर्थन के रूप में काम करेगा। प्रतिरोध स्तर 23,000-23,500 के बीच नजर आ रहा है। साप्ताहिक आरएसआई (Relative Strength Index) 27.88 पर है।
आने वाले सप्ताह में सभी की नजरें RBI Monetary Policy Committee की बैठक पर होंगी, जो 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक आयोजित होगी और यह FY27 का पहला सत्र है।
वैश्विक घटनाक्रम भी बाजार के लिए अहम बने रहेंगे। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज़ होता दिख रहा है, जिसमें सैन्य बढ़त और कड़े चेतावनी संदेश शामिल हैं। किसी भी नई बढ़ोतरी से वैश्विक जोखिम भावनाओं पर असर पड़ सकता है और शेयर बाजार में नई अस्थिरता आ सकती है।
कच्चे तेल की कीमतें भी एक महत्वपूर्ण कारक होंगी। हाल ही में ब्रेंट क्रूड $109 प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज़ में बाधाओं के कारण हुआ। फरवरी के अंत से यह कीमत 50% से अधिक बढ़ चुकी है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए इनपुट लागत और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया है।
With inputs from IANS