कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम: सरकारBy Admin Wed, 13 May 2026 12:14 PM

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले को देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की आर्थिक मजबूती बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जबकि प्लैटिनम पर यह शुल्क 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही गोल्ड और सिल्वर डोर, सिक्कों और अन्य संबंधित वस्तुओं पर भी शुल्क में बदलाव किए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों में अस्थिरता बढ़ी है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक देश है, इसलिए बढ़ती ऊर्जा कीमतें और सप्लाई में बाधाएं आयात बिल, महंगाई और चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

सरकार का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में विदेशी मुद्रा संसाधनों का इस्तेमाल प्राथमिक जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए। इनमें कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चा माल, रक्षा उपकरण, महत्वपूर्ण तकनीक और पूंजीगत वस्तुओं का आयात शामिल है, जो देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।

सूत्रों ने कहा कि कीमती धातुओं का आयात मुख्य रूप से उपभोग और निवेश आधारित होता है और इससे विदेशी मुद्रा का बड़ा बहिर्गमन होता है। इसके मुकाबले इनका सीधा संबंध उत्पादक औद्योगिक गतिविधियों से कम होता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के दौर में गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करना व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। इसी उद्देश्य से यह शुल्क वृद्धि की गई है ताकि गैर-आवश्यक आयात मांग को सीमित किया जा सके और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो।

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी प्रकार का प्रतिबंधात्मक या उपभोक्ता विरोधी फैसला नहीं है, बल्कि एक संतुलित और सोच-समझकर उठाया गया कदम है। इसका उद्देश्य आर्थिक जोखिमों के बीच देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखना है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि यह फैसला भारत की सतर्क आर्थिक नीति का संकेत देता है, जिससे भविष्य में किसी बड़े और कठोर आर्थिक कदम की जरूरत कम हो सकती है।

 

With inputs from IANS