
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा।
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, ने यह फैसला उत्पादन में संभावित कमी की आशंकाओं को देखते हुए लिया है।
Directorate General of Foreign Trade ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत जारी अधिसूचना में बताया कि कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी की निर्यात श्रेणी को ‘Restricted’ से बदलकर ‘Prohibited’ कर दिया गया है।
हालांकि, यूरोपीय संघ और अमेरिका को CXL तथा टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाला निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा। इसके लिए पहले से तय प्रक्रियाएं लागू रहेंगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत चीनी का निर्यात Ministry of Commerce and Industry की विदेशी व्यापार नीति 2023 और हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स 2023 के अनुसार जारी रहेगा।
भारत, ब्राजील के बाद दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातकों में शामिल है। इससे पहले सरकार ने अनुमान लगाया था कि उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा, जिसके चलते करीब 15.9 लाख मीट्रिक टन चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस फैसले से वैश्विक बाजार में कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। साथ ही एशिया और अफ्रीका के बाजारों में ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों के लिए निर्यात के नए अवसर भी खुल सकते हैं।
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में गन्ना उत्पादन में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे चीनी और एथेनॉल उद्योग को सहारा मिला है, हालांकि इसका लाभ मुख्य रूप से उन मिलों को मिला जिनके पास एथेनॉल उत्पादन की एकीकृत क्षमता मौजूद है।
With inputs from IANS