
नई दिल्ली। बढ़ती ईंधन और कच्चे माल की कीमतों के कारण भारत के कमर्शियल वाहन (Commercial Vehicle) उद्योग की वृद्धि दर अल्प और मध्यम अवधि में धीमी पड़ सकती है। हालांकि, वाहन निर्माता कंपनियां दीर्घकालिक मांग और बुनियादी ढांचा विकास को लेकर अब भी आशावादी बनी हुई हैं।
ब्रोकरेज फर्म PL Capital की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अधिकांश खंडों में बिक्री और डिस्पैच में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि कुछ उप-श्रेणियों में गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्री वाहन (Passenger Vehicles) खंड में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, दोपहिया वाहन (Two-Wheeler) बाजार में भी स्थिर वृद्धि बनी रही। अधिकांश वाहन निर्माताओं ने लगातार बनी खुदरा मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाई है और श्रमिकों की कमी तथा लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों को कम करने का प्रयास किया है।
कमर्शियल वाहन उद्योग में मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। मध्यम और भारी कमर्शियल वाहन (MHCV) श्रेणी में वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर रही, जबकि हल्के कमर्शियल वाहन (LCV) खंड ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा।
रिपोर्ट के अनुसार, पर्याप्त जलाशय स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में बनी मजबूत मांग के कारण ट्रैक्टर उद्योग भी लगातार विकास की राह पर बना हुआ है। हालांकि, आने वाले समय में मानसून की प्रगति और कृषि इनपुट लागत में बढ़ोतरी पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
इस बीच, एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2026 के दौरान भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों के चलते अधिक ग्राहक बैटरी चालित वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं।
मई में कुल यात्री वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह लगभग 4 प्रतिशत थी। इसी तरह, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8.9 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले वर्ष करीब 6.5 प्रतिशत थी।
इससे पहले Society of Indian Automobile Manufacturers ने बताया था कि अप्रैल में घरेलू यात्री वाहनों की डीलरों को आपूर्ति 25.4 प्रतिशत बढ़कर 4,37,312 इकाई रही। वहीं, दोपहिया वाहनों की बिक्री 28.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18,72,691 इकाई तक पहुंच गई।
यात्री वाहन क्षेत्र के लिए समग्र परिदृश्य फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि आने वाले समय में वृद्धि की गति कुछ धीमी पड़ सकती है।
उधर, Federation of Automobile Dealers Associations के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू ऑटो रिटेल उद्योग ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत बेहद मजबूत तरीके से की। अप्रैल में रिकॉर्ड 26,11,317 वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.94 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, ग्रामीण मांग और वाहनों के प्रतिस्थापन (Replacement Demand) से भारतीय ऑटो उद्योग को दीर्घकाल में मजबूती मिलती रहेगी।
With inputs from IANS