
नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin में शनिवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। बिटकॉइन की कीमत 60,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार हुआ है। इस गिरावट के साथ निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
बाजार में बिकवाली के दबाव के चलते बिटकॉइन एक समय करीब 7 प्रतिशत टूटकर 59,101 डॉलर तक पहुंच गया। बाद में इसमें मामूली सुधार देखा गया और यह लगभग 59,743 डॉलर पर कारोबार करता नजर आया।
बिटकॉइन ने अक्टूबर 2025 में 1.26 लाख डॉलर से अधिक का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। लेकिन उसके बाद से इसमें लगातार गिरावट का दौर जारी है और अब इसकी कीमत अपने उच्चतम स्तर से आधे से भी कम रह गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थागत निवेशकों द्वारा पूंजी निकालने और निवेश का रुख कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, ऊर्जा तथा बुनियादी ढांचा जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ने से क्रिप्टो बाजार पर दबाव बढ़ा है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों का झुकाव अब सोने और AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर उम्मीदों में बदलाव ने भी क्रिप्टो बाजार की मांग को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बिटकॉइन 60,000 से 62,000 डॉलर के दायरे में टिक पाता है या नहीं। यदि यह स्तर कायम रहता है, तो निवेशकों का भरोसा वापस लौट सकता है।
निकट भविष्य में निम्न कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं:
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टो उद्योग के अगले विकास चरण को निम्न पहलुओं से बल मिल सकता है:
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित होने के बजाय अपनी निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और पोर्टफोलियो संतुलन पर ध्यान देना चाहिए।
इसके अलावा, हाल के महीनों में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF से बड़े पैमाने पर निकासी भी बाजार पर दबाव का कारण बनी है। रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETF से 3 अरब डॉलर से अधिक की निकासी दर्ज की गई थी।
बाजार विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो कई क्रिप्टो माइनिंग कंपनियों पर नकदी प्रवाह का दबाव बढ़ सकता है, जिससे मजबूरन परिसंपत्तियों की बिक्री और बाजार में अतिरिक्त गिरावट देखने को मिल सकती है।
हालांकि, क्रिप्टो बाजार के समर्थकों का मानना है कि दीर्घकाल में तकनीकी नवाचार और संस्थागत स्वीकृति इस क्षेत्र को फिर से मजबूती प्रदान कर सकती है।
With inputs from IANS