
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तीसरे चरण के तहत 22 नई कंपनियों को मंजूरी दी है। इस कदम से 2,339.14 करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा और कपड़ा उद्योग की पूरी वैल्यू चेन में 36,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन परियोजनाओं से अधिसूचित टेक्सटाइल उत्पादों के माध्यम से 15,561.34 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। साथ ही, कपड़ा क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल 36,217 रोजगार सृजित होंगे।
नई मंजूरियों के बाद टेक्सटाइल के लिए पीएलआई योजना के तीसरे चरण में चयनित कंपनियों की कुल संख्या बढ़कर 96 हो गई है। इन कंपनियों ने सामूहिक रूप से 12,822.67 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे 58,294.18 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार होने की उम्मीद है।
मंजूरी प्राप्त कंपनियां मुख्य रूप से मानव निर्मित फाइबर (MMF) परिधान, MMF फैब्रिक और तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल) जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों के विस्तार से भारत मूल्य संवर्धित कपड़ा उत्पादों के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
सरकार के अनुसार, यह मंजूरी दर्शाती है कि उद्योग जगत टेक्सटाइल क्षेत्र के उभरते और उच्च विकास वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की सरकारी पहल में लगातार रुचि दिखा रहा है।
पीएलआई योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित निवेश और उत्पादन क्षमता एक मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसके तहत घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को सशक्त बनाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर जोर दिया जा रहा है।
टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना निर्यात क्षमता वाले और उच्च मूल्य संवर्धन वाले उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके माध्यम से भारत वैश्विक कपड़ा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी और प्रभाव को लगातार मजबूत कर रहा है।
With inputs from IANS