भारत ने अमेरिका के ‘अतिरिक्त उत्पादन क्षमता’ के दावों को किया खारिज, कहा- स्टील और टेक्सटाइल में कोई सरप्लस नहींBy Admin Thu, 11 June 2026 09:42 AM

नई दिल्ली: भारत ने अमेरिकी प्रशासन के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि भारतीय स्टील और वस्त्र (टेक्सटाइल) उद्योग में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता होने के कारण सस्ते दामों पर निर्यात किया जा रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Amitabh Kumar ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि भारत के स्टील और टेक्सटाइल क्षेत्रों में किसी प्रकार की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) नहीं है। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा की जा रही सेक्शन 301 जांच के तहत लगाए गए आरोपों को निराधार बताया।

कुमार ने कहा कि भारत के उत्पादन आंकड़ों को देश की विशाल आबादी और बढ़ती घरेलू मांग के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति उत्पादन और खपत के आधार पर भारत अभी भी कई विकसित देशों से काफी पीछे है।

हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि स्टील क्षेत्र को लेकर कुछ नई नीतिगत पहल और उपायों पर विचार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा शुरू की गई सेक्शन 301 जांच Section 301 Investigation के तहत यह परखा जाता है कि किसी देश की व्यापारिक नीतियां या सरकारी कदम अमेरिकी व्यापार हितों को नुकसान पहुंचा रहे हैं या नहीं। यह जांच अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 के तहत की जाती है।

सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Agreement) को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया भी इस जांच के निष्कर्षों से जुड़ी हुई है।

जानकारी के मुताबिक, नई दिल्ली अमेरिका से यह आश्वासन चाहती है कि व्यापार समझौते के बाद भारतीय उत्पादों पर कोई अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) नहीं लगाया जाएगा। भारत का मानना है कि इससे निवेशकों और कारोबारियों को अधिक स्थिरता और स्पष्टता मिलेगी।

इस बीच, अमेरिका द्वारा लागू किया गया 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ ढांचा 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। इसके बाद सामान्य मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) शुल्क दरें लागू होने की संभावना है।

भारत वार्ता के दौरान यह भी कोशिश कर रहा है कि उसे अन्य प्रतिस्पर्धी विनिर्माण देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ व्यवस्था मिले, ताकि वह वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आगे की प्रगति और सेक्शन 301 जांच के नतीजे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

 

WIth inputs from IANS