RBI के नए कदमों से FY27 में 40-50 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा प्रवाह की उम्मीद, रुपये को मिल सकता है सहाराBy Admin Fri, 12 June 2026 01:51 PM

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया कदमों से वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के दौरान भारत में 40 से 50 अरब डॉलर तक विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) प्रवाह आने की संभावना है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ेगी और रुपये को भी समर्थन मिलेगा।

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOFSL) की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की रियायती स्वैप सुविधा के तहत बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) मार्ग से फंड जुटाने पर बैंकों की उधारी लागत में लगभग 200 से 250 बेसिस प्वाइंट तक की कमी आ सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम फंडिंग लागत से बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी, ऋण वृद्धि को समर्थन मिलेगा और पूरे बैंकिंग क्षेत्र की फंडिंग दक्षता में सुधार होगा।

विश्लेषण के अनुसार, RBI की यह पहल वर्ष 2013 में शुरू किए गए एक समान कार्यक्रम जैसी है। उस समय FCNR(B) जमा के जरिए लगभग 27 अरब डॉलर और कुल एनआरआई जमा के रूप में करीब 34 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ था। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिली थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्तमान में FCNR(B) जमा बैंकिंग प्रणाली की कुल जमाओं का केवल 1.2 प्रतिशत हिस्सा है, जिससे इस क्षेत्र में वृद्धि की पर्याप्त संभावना मौजूद है। इसी संभावना को देखते हुए कई बैंकों ने विभिन्न अवधि की FCNR(B) जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ानी शुरू कर दी हैं, ताकि अनिवासी भारतीयों (NRI) को आकर्षित किया जा सके।

MOFSL का मानना है कि मजबूत ग्राहक आधार और बेहतर विदेशी नेटवर्क वाले बैंक इस अवसर का सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं और अपेक्षित विदेशी मुद्रा प्रवाह में बड़ी हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान ढांचा जमाकर्ताओं और बैंकों दोनों के लिए लाभकारी है, जिससे इसमें भागीदारी बढ़ने की संभावना है। विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि, बेहतर तरलता और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता को बढ़ावा देंगे और निवेशकों का भरोसा मजबूत करेंगे।

ब्रोकरेज हाउस ने अनुमान जताया है कि विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने पर निकट अवधि में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93-94 के स्तर तक मजबूत हो सकता है।

इसके अलावा, FCNR(B) आधारित फंडिंग से बैंकों को पारंपरिक थोक जमाओं की तुलना में लगभग 60 से 65 बेसिस प्वाइंट का अतिरिक्त लाभ मिलता है, क्योंकि इन जमाओं पर नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की अनिवार्यता लागू नहीं होती।

गौरतलब है कि RBI ने हाल ही में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी [FCNR(B)] जमा और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) के लिए विशेष सुविधाओं की घोषणा की है। इन उपायों का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ाना और बैंकिंग प्रणाली में तरलता को मजबूत करना है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और पूंजी प्रवाह पर लगातार नजर बनी हुई है।
 

 

With inputs from IANS