शेयर बाजार में तेजी बरकरार, सेंसेक्स 347 अंक और निफ्टी 24,000 के पार बंदBy Admin Wed, 17 June 2026 05:45 PM

मुंबई: धातु, सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) के बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में खरीदारी के दम पर बुधवार को घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख बनाए रखा।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 347.14 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,155.62 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 96.55 अंक यानी 0.40 प्रतिशत चढ़कर 24,085.70 के स्तर पर पहुंच गया। चुनिंदा दिग्गज शेयरों में खरीदारी के चलते निफ्टी एक बार फिर 24,000 के अहम स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीकी दृष्टि से निफ्टी के लिए 24,100 से 24,200 का दायरा फिलहाल निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र बनकर उभरा है। वहीं, 24,000 का स्तर तत्काल मजबूत समर्थन (सपोर्ट) का काम कर सकता है, क्योंकि पहले यही स्तर बाजार के लिए बड़ी बाधा बना हुआ था।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाले शेयर रहे, जिससे पूरे बाजार का रुझान सकारात्मक बना रहा।

व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.52 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सबसे बेहतर प्रदर्शन निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने किया। इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वहीं, ऑटो और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई।

अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के नतीजों से पहले निवेशकों ने 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाई। बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में फिलहाल स्थिर रख सकता है।

निवेशकों की नजर फेड की महंगाई, आर्थिक विकास और भविष्य की ब्याज दरों को लेकर आने वाली टिप्पणियों पर टिकी हुई है। इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति और आगे की नीति का संकेत मिलेगा। साथ ही हालिया भू-राजनीतिक तनावों का वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर क्या असर पड़ सकता है, इस पर भी फेड के रुख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निवेशकों को वैश्विक तनाव कम होने और स्थिति स्थिर रहने का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक बाजार भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बना रहेगा और समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

इस बीच, रुपया भी लगभग स्थिर रहा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.50 के आसपास कारोबार करता रहा। डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतों में सीमित दायरे में कारोबार होने के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में रुपया 94.00 से 94.85 के दायरे में कारोबार कर सकता है। आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की टिप्पणी पर निर्भर करेगी।
 

 

With inputs from IANS