




नई दिल्ली: भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए अब केवल कारोबार बढ़ाना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता नहीं रह गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 78 प्रतिशत MSME ने आने वाले वर्ष के लिए परिचालन दक्षता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है, जो राजस्व वृद्धि और नए ग्राहक जोड़ने जैसे लक्ष्यों से भी आगे निकल गई है।
साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 71 प्रतिशत MSME ने राजस्व वृद्धि और 64 प्रतिशत ने नए ग्राहकों को जोड़ने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। हालांकि, अब व्यवसाय उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 58 प्रतिशत MSME डिजिटल परिवर्तन (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) को अपनाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि 57 प्रतिशत लागत कम करने (कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन) पर काम कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि छोटे और मध्यम उद्योग बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने के लिए तकनीक का अधिक उपयोग करना चाहते हैं।
आने वाले समय को देखते हुए 55 प्रतिशत MSME कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने की योजना बना रहे हैं, जबकि 52 प्रतिशत साइबर सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कंपनियां नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहती हैं।
सीएमआर के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप (IRG) के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम ने कहा कि मौजूदा अनिश्चित कारोबारी माहौल में MSME अब केवल आय बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उत्पादकता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि व्यवस्थित मूल्यांकन (Assessment) आधारित रणनीति अपनाने से MSME अपनी जरूरतों के अनुरूप क्लाउड, कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा और अन्य डिजिटल समाधानों का चयन कर पा रहे हैं, जिससे उनकी व्यावसायिक योजनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने में मदद मिल रही है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल परिवर्तन की आवश्यकता को समझने के बावजूद उसे प्रभावी ढंग से लागू करना अभी भी कई MSME के लिए चुनौती बना हुआ है।


बजट की कमी, डिजिटल कौशल की कमी, साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और सही तकनीक के चयन को लेकर असमंजस डिजिटल अपनाने की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 26 प्रतिशत MSME ने संगठन के भीतर डिजिटल विशेषज्ञता की कमी को सबसे बड़ी बाधा बताया, जबकि 20 प्रतिशत सही तकनीकी समाधान चुनने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
इसके अलावा, करीब 6 प्रतिशत MSME ने भरोसेमंद तकनीकी सलाहकारों की कमी को भी एक बड़ी चुनौती बताया, जिससे स्पष्ट होता है कि तेजी से बदलते डिजिटल माहौल में छोटे उद्योगों को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
With inputs from IANS
