

वॉशिंगटन। यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पूरा करने के बाद भारत अब दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को तेजी से विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रहा है। उत्तर अमेरिका, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और खाड़ी देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत जारी है या जल्द शुरू होने वाली है।
पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन ने कहा कि भारत का लक्ष्य दुनिया के लगभग हर प्रमुख क्षेत्र के साथ व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा, "व्यापक रूप से हमारा उद्देश्य पूरी दुनिया को कवर करना है। हमारे सामने कई वार्ताएं चल रही हैं और हम सभी देशों के साथ संबंधों में विविधता लाने, नई साझेदारियां बनाने और व्यापार बढ़ाने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं।"

जैन ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में जिन देशों के साथ भारत ने व्यापार समझौते किए हैं, वे वैश्विक व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हैं। अब सरकार उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां भारत के व्यापारिक समझौते अपेक्षाकृत कम हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर अमेरिका में भारत कनाडा के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है, जबकि मेक्सिको के साथ भी चर्चा शुरू हो चुकी है।
लैटिन अमेरिका में भारत चिली और पेरू के साथ एफटीए पर बातचीत कर रहा है। इसके अलावा मर्कोसुर (Mercosur) समूह के साथ मौजूदा प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (पीटीए) का दायरा बढ़ाने पर भी चर्चा चल रही है।
जैन ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में भी अपनी व्यापारिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ पहले से व्यापार समझौते मौजूद हैं, जबकि कतर, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ बातचीत जारी है।
अफ्रीका को भी भारत ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इस दिशा में दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (सैकू) और केन्या के साथ व्यापार समझौतों पर वार्ता चल रही है।
पूर्वी देशों की बात करें तो भारत पहले ही जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और आसियान सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौते कर चुका है। वहीं, ओशिनिया क्षेत्र में हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ भी समझौते पूरे किए गए हैं।
दर्पण जैन ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ हुआ समझौता भारत के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों में से एक है। यह सरकार की उस मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है, जिसके तहत वैश्विक बाजारों तक भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और निर्यातकों को मिलने वाली चुनौतियों को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की नई व्यापार नीति केवल निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आयात के प्रति अधिक खुला दृष्टिकोण अपनाने और भारतीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाने पर भी केंद्रित है।
कार्यक्रम में यूरोपीय संघ के मुख्य वार्ताकार क्रिस्टोफ कीनर ने भी कहा कि ईयू अपने लगभग आधे व्यापार को वरीयता प्राप्त व्यापार समझौतों के दायरे में ला चुका है। अब उसका ध्यान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में थाईलैंड, फिलीपींस और मलेशिया के साथ समझौतों को अंतिम रूप देने के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी व्यापार वार्ता आगे बढ़ाने पर है।
With inputs from IANS