ई20 पेट्रोल से माइलेज में मामूली कमी संभव, लेकिन पर्यावरण और इंजन के लिए अधिक फायदेमंद: पेट्रोलियम मंत्रालयBy Admin Fri, 10 July 2026 01:14 PM

नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है, लेकिन इसके बदले यह ईंधन कई महत्वपूर्ण फायदे भी देता है। मंत्रालय के अनुसार, ई20 का ऑक्टेन रेटिंग अधिक है, इसमें बेहतर एंटी-नॉक क्षमता होती है, ईंधन तेजी से जलता है, वाहन की पिकअप और एक्सेलरेशन बेहतर होती है तथा इंजन अपेक्षाकृत साफ रहता है।

मंत्रालय ने बताया कि ई10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू करने से पहले ही वर्ष 2020-21 में वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक चर्चा शुरू कर दी गई थी। भारत ने जून 2022 में निर्धारित समय से पांच महीने पहले ही ई10 मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था।

मंत्रालय के मुताबिक, ई20 को लागू करने से पहले और भी विस्तृत प्रक्रिया अपनाई गई। वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटो पार्ट्स सप्लायर, परीक्षण एजेंसियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। वर्ष 2021 में सार्वजनिक किए गए रोडमैप के आधार पर चरणबद्ध तरीके से ई20 की दिशा में आगे बढ़ा गया।

इस दौरान ईंधन की गुणवत्ता, इंजन की कार्यक्षमता, सामग्री की अनुकूलता, फ्यूल सिस्टम, वाहन की ड्राइविंग क्षमता, टिकाऊपन, उत्सर्जन और माइलेज जैसे सभी पहलुओं का गहन परीक्षण किया गया। मंत्रालय का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनियां परीक्षण के नतीजों से संतुष्ट नहीं होतीं तो वे न तो ई20 का समर्थन करतीं और न ही वाहनों की वारंटी जारी रखतीं। वर्तमान में लगभग सभी प्रमुख वाहन निर्माता ई20 के उपयोग के बावजूद पुराने और नए दोनों तरह के वाहनों की वारंटी का सम्मान कर रहे हैं।

मंत्रालय ने वास्तविक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मारुति सुजुकी ने 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जो ई20-प्रमाणित नहीं थे। कंपनी को ई20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसावट या पुर्जों की उम्र कम होने जैसी कोई समस्या नहीं मिली। हीरो मोटोकॉर्प का अनुभव भी इसी तरह का रहा है।

मंत्रालय के अनुसार, ई20 के उपयोग से कणीय प्रदूषण (पार्टिकुलेट एमिशन) लगभग नगण्य रहता है और पूरे जीवनचक्र के दौरान कार्बन उत्सर्जन में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आती है। इसलिए यह ई10 और सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक प्रभावी ईंधन माना जाता है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 की तुलना प्रीमियम पेट्रोल से करना उचित नहीं है। प्रीमियम पेट्रोल सीमित मात्रा में विशेष एडिटिव्स के साथ बेचा जाता है और इसकी कीमत भी अधिक होती है, जबकि पूरे देश में सामान्य पेट्रोल, ई10 और ई20 की अलग-अलग आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखना कहीं अधिक जटिल और महंगा होगा।

मंत्रालय ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़ी आधारभूत संरचना के विकास के लिए हर वर्ष लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को वित्तीय सहायता दी है। इस निवेश से एथेनॉल संयंत्र, डिस्टिलरी, भंडारण सुविधाएं और परिवहन नेटवर्क विकसित किए गए हैं, ताकि देश के एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
 

 

With inputs from IANS