
नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी को कर्नाटक के मंगलूरु में 17.5 लाख मीट्रिक टन (1.75 एमएमटी) क्षमता का नया रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) विकसित करने के लिए अपने निदेशक मंडल से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की मानी जा रही है और इसे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
कंपनी ने नियामकीय सूचना में बताया कि प्रस्तावित सुविधा मंगलूरु स्थित मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के पहले चरण के विस्तार के रूप में विकसित की जाएगी। इसके साथ आवश्यक आधारभूत ढांचे का भी निर्माण किया जाएगा।
ओएनजीसी के निदेशक मंडल ने केंद्र सरकार से यह भी आग्रह करने का निर्णय लिया है कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए आवश्यक नियामकीय सहयोग और नीतिगत प्रावधान किए जाएं।
एक विश्लेषण के अनुसार, ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के बाद भारत अपने रणनीतिक कच्चे तेल भंडार को मजबूत करने और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है।
वर्तमान में भारत के पास मंगलूरु, पादुर और विशाखापत्तनम में कुल 53.3 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले रणनीतिक कच्चे तेल भंडार हैं। इनका संचालन सरकारी कंपनी इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) करती है।
मंगलूरु में ओएनजीसी की सहायक कंपनी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) प्रतिदिन लगभग तीन लाख बैरल क्षमता वाली रिफाइनरी संचालित करती है। यहां मौजूद 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले मौजूदा रणनीतिक भंडार का आधा हिस्सा एमआरपीएल को पट्टे पर दिया गया है, जबकि शेष क्षमता अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) को लीज पर दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान एडीएनओसी ने भारत में अपनी कच्चे तेल भंडारण क्षमता को बढ़ाकर लगभग तीन करोड़ बैरल तक करने और भारत के रणनीतिक भंडारण कार्यक्रम के तहत फुजैरा में भी कच्चे तेल के भंडारण की संभावनाओं पर काम करने की घोषणा की थी।
भारत ओडिशा के चांदीखोल में 40 लाख मीट्रिक टन क्षमता का नया रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तथा कर्नाटक के पादुर में 25 लाख मीट्रिक टन क्षमता की एक नई सुविधा विकसित करने की भी योजना बना रहा है। हालांकि, ओएनजीसी ने मंगलूरु परियोजना की अनुमानित लागत और इसके पूरा होने की समयसीमा का अभी खुलासा नहीं किया है।
With inputs from IANS