जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87 प्रतिशत पहुंची, खाद्य और कच्चे तेल की कीमतों का असरBy Admin Tue, 14 July 2026 03:10 PM

नई दिल्ली: देश में जून 2026 के दौरान थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई। मंगलवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। मई में यह दर 9.68 प्रतिशत थी।

मंत्रालय के अनुसार, जून में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 110.2 पर पहुंच गया।

प्रमुख श्रेणियों में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई 7 प्रतिशत रही, जबकि ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई घटकर 27.41 प्रतिशत पर आ गई। वहीं, विनिर्मित (मैन्युफैक्चर्ड) उत्पादों की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही।

खाद्य वस्तुओं और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को शामिल करने वाला डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक जून में 6.14 प्रतिशत की वार्षिक महंगाई दर्ज करता है। प्राथमिक वस्तुओं के भीतर खाद्य वस्तुओं की महंगाई 5.49 प्रतिशत रही, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई 11.07 प्रतिशत दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, खनिज तेलों की महंगाई दर 46.48 प्रतिशत रही, जबकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में सालाना आधार पर 34.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मंत्रालय ने अप्रैल 2026 के अंतिम संशोधित आंकड़े भी जारी किए। अप्रैल की थोक महंगाई दर को शुरुआती अनुमान 8.26 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.36 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह अप्रैल का संशोधित थोक मूल्य सूचकांक 108.9 रहा, जबकि प्रारंभिक अनुमान 108.8 था।

जून के लिए जारी अस्थायी आंकड़े 82.6 प्रतिशत भारित प्रतिक्रिया दर के आधार पर तैयार किए गए हैं, जबकि अप्रैल के अंतिम संशोधित आंकड़े 97.5 प्रतिशत भारित प्रतिक्रिया दर पर आधारित हैं।

जून में सभी वस्तुओं के लिए अखिल भारतीय आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (ओपीपीआई) 109.9 दर्ज किया गया। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र के लिए अस्थायी इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (आईपीपीआई) 107.1 रहा। अप्रैल के अंतिम संशोधित आईपीपीआई को 104.9 के प्रारंभिक अनुमान से संशोधित कर 104.2 किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि जुलाई 2026 के लिए थोक महंगाई के अस्थायी आंकड़े 14 अगस्त को जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि सरकार ने हाल ही में थोक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला लागू की है, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है। इससे पहले 2011-12 आधार वर्ष वाली श्रृंखला का उपयोग किया जा रहा था। इसके साथ ही सरकार ने सात सेवा क्षेत्रों के लिए उत्पादक मूल्य सूचकांक, इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक और सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखलाएं भी जारी की हैं।

 

With inputs from IANS