कैबिनेट ने 1.27 लाख करोड़ रुपये की ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना को दी मंजूरी, भारत में चिप निर्माण को मिलेगा बड़ा बढ़ावाBy Admin Wed, 15 July 2026 04:49 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय वाली ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना को मंजूरी दे दी। यह योजना ‘सेमिकॉन 1.0’ की सफलता के बाद अगला बड़ा कदम मानी जा रही है।

सरकार के अनुसार, अब तक कुल 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। इनसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक उपकरण, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों की चिप जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

मंजूर की गई 12 परियोजनाओं में से माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि एक अन्य इकाई के वर्ष 2026 में उत्पादन शुरू करने की उम्मीद है।

इसके अलावा, स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए मंजूरी दी गई है। वहीं, 105 स्टार्टअप और एमएसएमई को उद्योग मानकों के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

कैबिनेट की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘सेमिकॉन 2.0’ का उद्देश्य ‘सेमिकॉन 1.0’ से मिली गति को आगे बढ़ाते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के प्रमुख देशों में स्थापित करना है।

यह योजना छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी।

पहला स्तंभ चिप डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना है। वर्तमान में 105 स्टार्टअप चिप डिजाइन पर कार्य कर रहे हैं। नई योजना के तहत स्वदेशी बौद्धिक संपदा (आईपी) और उन्नत चिप डिजाइन विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

दूसरा स्तंभ मशीनों और कच्चे माल से जुड़ा है। सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनों, रसायनों, गैसों और अन्य आवश्यक सामग्रियों के अनुसंधान, विकास और निर्माण से जुड़ी कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे देश में उच्च-परिशुद्धता विनिर्माण उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।

तीसरा स्तंभ नए फैब संयंत्रों की स्थापना है। सरकार के अनुसार, पहला सेमीकंडक्टर फैब वर्ष 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद अधिक वैश्विक कंपनियों को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जाएगा।

चौथा स्तंभ एटीएमपी (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) तथा ओसैट (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) इकाइयों को बढ़ावा देना है। सरकार का लक्ष्य भारत में अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीकों को लाना और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है।

पांचवां स्तंभ अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) है। वर्तमान में भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा 28 नैनोमीटर से 110 नैनोमीटर तकनीक से शुरू हुई है। अब अधिक उन्नत नोड्स और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास के लिए देश और विदेश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाया जाएगा।

छठा स्तंभ कौशल विकास है। अभी तक 315 विश्वविद्यालयों में नवीनतम ईडीए उपकरणों के माध्यम से लगभग 68,000 छात्रों को जटिल चिप डिजाइन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ‘सेमिकॉन 2.0’ के तहत इस प्रशिक्षण को और व्यापक तथा गहन बनाया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योग के अनुरूप कौशल प्राप्त हो सके।

 

With inputs from IANS