
नई दिल्ली। लगातार दो वर्षों तक घाटे में रहने के बाद वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स-बीओपी) फिर से अधिशेष में आ सकता है। केयरएज रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और अन्य पूंजी प्रवाह में मजबूती आने से यह सुधार संभव होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध एफडीआई बढ़कर 15 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 6.9 अरब डॉलर था। सकल एफडीआई निवेश में बढ़ोतरी और निवेश वापसी (रिपैट्रिएशन) में कुछ कमी इसके प्रमुख कारण होंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफसीएनआर (बी) जमा, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा में विदेशी उधारी के लिए रियायती स्वैप सुविधाओं से वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 45 से 60 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त पूंजी आने की संभावना है।
इसके चलते पूंजी खाते का अधिशेष वित्त वर्ष 2025-26 के करीब 2 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 73 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
केयरएज रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए चालू खाता घाटा (सीएडी) के अपने अनुमान को भी घटा दिया है। पहले जहां इसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वहीं अब इसे 0.8 से 1.2 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाले प्रेषण (रेमिटेंस) में मजबूती तथा वस्तु निर्यात में सुधार के कारण चालू खाता घाटे का अनुमान कम किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संशोधित अनुमान इस आधार पर तैयार किया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहेगी। यदि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें इससे भी कम रहती हैं, तो चालू खाता घाटा जीडीपी के एक प्रतिशत से भी नीचे आ सकता है।
विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई नीतिगत कदम उठाए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा बॉन्ड के दायरे का विस्तार, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत और पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए कर छूट तथा अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए निवेश सीमा बढ़ाना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऋण बाजार से जुड़े कुछ सुधार भारत को ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल किए जाने की दिशा में मौजूद प्रमुख बाधाओं को भी दूर करते हैं। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में बढ़ोतरी को बल मिलने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात ने मजबूत शुरुआत की है। इस दौरान कुल निर्यात में 15.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोलियम निर्यात 35.1 प्रतिशत बढ़ा, जबकि गैर-पेट्रोलियम निर्यात में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में भी वस्तु निर्यात की यह सकारात्मक रफ्तार जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि, भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा 12.5 प्रतिशत तक अधिक शुल्क लगाए जाने की संभावना एक ऐसा पहलू है, जिस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।
With inputs from IANS