वैश्विक चिप कारोबार में सुस्ती भारत के लिए राहत, एफपीआई निवेश में बढ़त; कच्चे तेल की कीमत बनी चिंताBy Admin Sun, 26 July 2026 10:49 AM

मुंबई: वैश्विक चिप कारोबार में आई सुस्ती भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इसका असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) पर भी दिखा है। 24 जुलाई तक जुलाई महीने में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में 14,945 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें 3,167 करोड़ रुपये एक्सचेंजों के जरिए और 11,778 करोड़ रुपये प्राथमिक बाजार (प्राइमरी मार्केट) में लगाए गए।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऋण बाजार (डेट मार्केट) में भी विदेशी निवेश लगातार मजबूत बना हुआ है। इसकी एक बड़ी वजह सरकार द्वारा घोषित डेट टैक्सेशन सुधार हैं। इसी दौरान विदेशी निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगातार बिकवाली जारी रखी, जिससे भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि वैश्विक चिप कारोबार की कमजोरी भारत के लिए सकारात्मक है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई तेजी चिंता का विषय है। यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो इसका असर भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है और वे स्थिर होती हैं, तो विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में लगातार खरीदारी कर सकते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर खास नजर रखनी होगी।

बीते सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और कमजोरी का माहौल रहा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहे और कंपनियों के तिमाही नतीजों ने कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेश के अवसर भी दिए, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं ने इन सकारात्मक पहलुओं पर भारी असर डाला।

सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 2.68 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर पहुंच गया।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली, खासकर वित्तीय शेयरों में, बाजार पर दबाव बनाए हुए है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक तनाव के कारण निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

हालांकि, घरेलू आर्थिक मोर्चे पर कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 964 मिलियन डॉलर बढ़कर 675.16 अरब डॉलर हो गया है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगले सप्ताह बाजार की दिशा प्रमुख वैश्विक नीतिगत फैसलों, घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय होगी।

 

With inputs from IANS