भारत के निजी स्पेसटेक सेक्टर ने रचा नया कीर्तिमान, जुलाई तक जुटाए 87.1 करोड़ डॉलर का निवेशBy Admin Tue, 28 July 2026 01:49 PM

नई दिल्ली — भारत का निजी स्पेसटेक (अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी) क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 तक इस क्षेत्र ने 241 फंडिंग राउंड के जरिए रिकॉर्ड 87.1 करोड़ डॉलर (871 मिलियन डॉलर) का निवेश हासिल किया है। सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों और निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने के बाद निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ा है।

ट्रैक्सन (Tracxn) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पेसटेक इकोसिस्टम में फिलहाल 285 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें से 274 सक्रिय हैं। इनमें 72 स्टार्टअप्स ऐसे हैं जिन्हें लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट निर्माण, प्रोपल्शन सिस्टम, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस, अर्थ ऑब्जर्वेशन और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में संस्थागत निवेश प्राप्त हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के नियामकीय सुधारों ने निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता आसान बनाया। इसी का परिणाम है कि भारत ने अपना पहला स्पेसटेक यूनिकॉर्न तैयार किया और पहली बार किसी निजी कंपनी द्वारा विकसित रॉकेट से सफल ऑर्बिटल लॉन्च हासिल किया।

रिपोर्ट में स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 मिशन का विशेष उल्लेख किया गया है। 18 जुलाई को इस मिशन ने 450 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में सफलतापूर्वक चार पेलोड स्थापित किए। इसके साथ भारत, अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया, जिसने निजी क्षेत्र की मदद से ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल की है।

यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2020 में निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के केवल छह वर्षों के भीतर भारत ने पहला निजी ऑर्बिटल लॉन्च सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। स्काईरूट एयरोस्पेस इस वर्ष एक और परीक्षण उड़ान की तैयारी कर रही है और 2027 से व्यावसायिक लॉन्च सेवाएं शुरू करने की योजना है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 में इस क्षेत्र में 12 फंडिंग राउंड के जरिए 4.3 करोड़ डॉलर का निवेश हुआ था, जो 2025 में बढ़कर 53 राउंड में 20 करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2026 में भी निवेश की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।

2025 और 2026 के दौरान हुए पांच बड़े निवेश सौदों—जिनमें स्काईरूट एयरोस्पेस को 5 करोड़ डॉलर (सीरीज-सी), डिजांटारा को 5 करोड़ डॉलर (सीरीज-बी) और अग्निकुल कॉसमॉस को 1.7 करोड़ डॉलर (सीरीज-सी) का निवेश शामिल है—ने मिलकर 15.8 करोड़ डॉलर जुटाए, जो इन दो वर्षों में प्राप्त कुल निवेश का आधे से अधिक हिस्सा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शुरुआती चरण (सीड स्टेज) का निवेश 2022 के 70 लाख डॉलर से बढ़कर 2025 में 6.2 करोड़ डॉलर हो गया। वहीं, लेट-स्टेज फंडिंग पहली बार 2025 में 1.7 करोड़ डॉलर और 2026 में अब तक 5.3 करोड़ डॉलर तक पहुंच गई।

शहरों की बात करें तो बेंगलुरु निजी स्पेसटेक निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां 106 फंडिंग राउंड के जरिए 49.5 करोड़ डॉलर का निवेश आया। इसके बाद हैदराबाद में 20.5 करोड़ डॉलर और चेन्नई में 8 करोड़ डॉलर का निवेश दर्ज किया गया। इन तीनों शहरों ने मिलकर भारत के निजी स्पेसटेक क्षेत्र में हुए अधिकांश इक्विटी निवेश को आकर्षित किया।

स्टार्टअप्स में स्काईरूट एयरोस्पेस सबसे अधिक निवेश पाने वाली कंपनी रही, जिसने 15 करोड़ डॉलर जुटाए। इसके बाद पिक्सल (9.6 करोड़ डॉलर), अग्निकुल कॉसमॉस (7.6 करोड़ डॉलर), डिजांटारा (6.7 करोड़ डॉलर) और बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस (3.4 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा।

 

With inputs from IANS