

नई दिल्ली। भारत का ऑटो कंपोनेंट (ऑटो पार्ट्स) उद्योग वित्त वर्ष 2030 तक करीब 10 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की संभावना है। इसकी बड़ी वजह कंपनियों का सेमीकंडक्टर उपकरण, रक्षा, एयरोस्पेस और डेटा सेंटर पावर जेनरेशन जैसे अधिक मुनाफे वाले प्रिसिजन इंजीनियरिंग क्षेत्रों में तेजी से विस्तार करना है। यह जानकारी अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की एक नई रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में उद्योग का अनुमानित राजस्व 85.6 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 124.4 अरब डॉलर पहुंच सकता है।
इसी अवधि में उद्योग का EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है, जो राजस्व वृद्धि से भी तेज होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का ऑटो सेक्टर बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में कई ऑटो कंपोनेंट निर्माता अपने उत्पादों के पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं और मौजूदा तकनीकी क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर अधिक लाभ कमाने की रणनीति अपना रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने की कोशिशों के चलते सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियां भारत की ओर रुख कर रही हैं। इससे भारतीय प्रिसिजन मशीनिंग कंपनियों के लिए सेमीकंडक्टर वेफर निर्माण उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपोनेंट, एयरोस्पेस, रक्षा और डेटा सेंटर पावर जेनरेशन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि इन कंपनियों को केवल पारंपरिक ऑटो कंपोनेंट निर्माता मानना सही तस्वीर पेश नहीं करता, क्योंकि अब उनके कारोबार के अवसर कई नए क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच उद्योग की वृद्धि को इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, आगामी आठवां वेतन आयोग, निर्यात में वृद्धि, पारंपरिक इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) से जुड़े कंपोनेंट निर्माण का भारत की ओर स्थानांतरण और रक्षा, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर तथा एयरोस्पेस क्षेत्रों में विविधीकरण गति देगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम श्रम लागत, पारंपरिक ICE उत्पादों में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपेक्षाकृत धीमी गति से अपनाए जाने का लाभ भी घरेलू ऑटो कंपोनेंट कंपनियों को मिलेगा।
गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान जताया है कि अगले वेतन आयोग से बढ़ने वाली मांग के दौर में ऑटो कंपोनेंट कंपनियां वाहन निर्माताओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि उनके उत्पाद कई वाहन कंपनियों को आपूर्ति किए जाते हैं और उनका कारोबार किसी एक वाहन मॉडल की सफलता पर निर्भर नहीं रहता।
रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा, निर्माण और ऊर्जा को शामिल करने वाला "अदर्स" श्रेणी का कारोबार वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच 16 प्रतिशत की CAGR से बढ़ सकता है, जो अध्ययन किए गए सभी क्षेत्रों में सबसे तेज वृद्धि दर होगी।
With inputs from IANS
