

नई दिल्ली: देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited (बीपीसीएल) और Hindustan Petroleum Corporation Limited (एचपीसीएल)—की जुलाई 2026 में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि देश में तेज आर्थिक गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र में बढ़ती मांग का संकेत मानी जा रही है।
देश में सबसे अधिक खपत वाले ईंधन डीजल की बिक्री जुलाई में 10.7 प्रतिशत बढ़कर 71.2 लाख टन पहुंच गई, जबकि जुलाई 2025 में यह 64.3 लाख टन थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में देरी के कारण खरीफ बुवाई के दौरान किसानों ने सिंचाई के लिए डीजल पंपों का अधिक उपयोग किया। वहीं, पिछले एक वर्ष में नए राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे शुरू होने से ट्रकों और बसों की आवाजाही बढ़ी, जिससे डीजल की मांग में और तेजी आई। जुलाई 2024 की तुलना में डीजल की खपत 11.5 प्रतिशत और 2023 की तुलना में 12.7 प्रतिशत अधिक रही।

वहीं, पेट्रोल की बिक्री भी जुलाई में 9.7 प्रतिशत बढ़कर 34.5 लाख टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने यह 31.4 लाख टन थी। इससे निजी वाहनों के उपयोग और सड़क परिवहन में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है।
हवाई ईंधन (एटीएफ) की बिक्री में भी 2.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 6.59 लाख टन रही। हालांकि, जून 2026 की तुलना में इसमें 4.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसकी प्रमुख वजह मानसून के दौरान खराब मौसम के कारण कई उड़ानों का रद्द होना बताया गया है।
दूसरी ओर, रसोई गैस (एलपीजी) की बिक्री में 17.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और यह घटकर 23.7 लाख टन रह गई। सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने और पश्चिम एशिया संकट के बीच स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में आपूर्ति बाधित होने से एलपीजी आयात प्रभावित हुआ। इसका असर होटल और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति पर भी पड़ा।
With inputs from IANS