





नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत के स्टील उद्योग ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। केंद्रीय इस्पात मंत्रालय के गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में फिनिश्ड स्टील का उत्पादन 4 प्रतिशत बढ़कर 54.3 मिलियन टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 52.2 मिलियन टन था।
देश में फिनिश्ड स्टील की खपत भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। अप्रैल से जुलाई के बीच इसकी खपत 7.8 प्रतिशत बढ़कर 55.9 मिलियन टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 51.9 मिलियन टन थी। मंत्रालय के अनुसार, राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसे बड़े सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों ने स्टील की मांग को मजबूत किया है।
भारत के स्टील निर्यात में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। अप्रैल-जुलाई के दौरान स्टील निर्यात 35 प्रतिशत बढ़कर 22.92 लाख टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 16.98 लाख टन था।
मूल्य के लिहाज से भी निर्यात में शानदार वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में स्टील निर्यात का मूल्य 29.4 प्रतिशत बढ़कर 18,105.4 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 13,996.2 करोड़ रुपये था।
सिर्फ जून महीने की बात करें तो स्टील निर्यात 38.1 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख टन पहुंच गया, जबकि जून 2025 में यह 4.46 लाख टन था।
वहीं, क्रूड स्टील उत्पादन अप्रैल-जुलाई के दौरान 2.6 प्रतिशत बढ़कर 56.3 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 54.9 मिलियन टन था।
सरकार के अनुसार, भारत की कुल क्रूड स्टील उत्पादन क्षमता फिलहाल 222 मिलियन टन प्रति वर्ष है। इससे देश राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इस्पात कंपनी सेल (SAIL) ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया। कंपनी का शुद्ध लाभ 138 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,636 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन से आय 26,246 करोड़ रुपये रही।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए DRDO की डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी (DMRL) ने SAIL को DMR-249A, DMR-249B और DMR-249BK ग्रेड स्टील के उत्पादन की तकनीक हस्तांतरण (LAToT) का लाइसेंस भी प्रदान किया है। इन विशेष स्टील ग्रेड का उपयोग नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण में किया जाएगा।
इसके अलावा, जुलाई 2026 में SAIL ने राउरकेला स्टील प्लांट में अपना पहला 0.18 एमटीपीए माइक्रो पेलेट प्लांट शुरू किया। यह संयंत्र स्टील उत्पादन से निकलने वाले अपशिष्ट को मूल्यवर्धित माइक्रो पेलेट में बदलता है, जिससे लैंडफिल कचरा कम होगा और कच्चे माल के पुनर्चक्रण के जरिए आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
With inputs from IANS