
सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर बढ़ाई गई कस्टम ड्यूटी से सरकार को करीब 80 दिनों में 10,463 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
सरकार के मुताबिक, 13 मई से 2 अगस्त के बीच की अवधि में सोने के आयात से 10,040 करोड़ रुपये, चांदी से 328 करोड़ रुपये और प्लैटिनम से 95 करोड़ रुपये का कस्टम ड्यूटी राजस्व प्राप्त हुआ। इस तरह तीनों की कुल कस्टम ड्यूटी 10,463 करोड़ रुपये रही।
मई में बढ़ाई गई थी इंपोर्ट ड्यूटी
केंद्र सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी के आयात पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। वहीं, प्लैटिनम पर आयात शुल्क 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 15.4 फीसदी किया गया।
इसके साथ ही सोना-चांदी डोरे, सिक्कों और अन्य संबंधित उत्पादों पर लागू शुल्क में भी जरूरी बदलाव किए गए थे।
सरकार ने क्यों बढ़ाई ड्यूटी?
वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, आयात शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य गैर-जरूरी और विवेकाधीन आयात को नियंत्रित करना तथा विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए प्राथमिकता के आधार पर करना है।
सरकार ने कच्चे तेल, उर्वरक, औद्योगिक कच्चे माल और पूंजीगत वस्तुओं जैसी आवश्यक चीजों के आयात को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच लिया गया फैसला
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ रही थीं। पश्चिम एशिया में संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की प्रभावी नाकेबंदी जैसी परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल के साथ-साथ खाद्य और उर्वरक के आयात की लागत पर भी दबाव बढ़ा था।
ऐसे माहौल में भारत के लिए विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल पर नियंत्रण रखना आर्थिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सोने का आयात इसमें खास महत्व रखता है क्योंकि देश में हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा सोना खरीदने में खर्च होती है।
सोने की तस्करी पर भी कार्रवाई तेज
सरकार ने लोकसभा में सोने की तस्करी को लेकर भी आंकड़े साझा किए। 13 मई से 30 जून के बीच प्रवर्तन एजेंसियों ने 161 किलोग्राम तस्करी का सोना जब्त किया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया।
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीन के बाद भारत में सोने की मांग सबसे अधिक है और घरेलू मांग का बड़ा हिस्सा आभूषण उद्योग से आता है।
सोना भारतीय परिवारों के लिए केवल आभूषण ही नहीं, बल्कि पारंपरिक बचत और निवेश का भी महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आयात शुल्क और रुपये की विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों और मांग पर पड़ता है।
सरकार के लिए सोने के आयात की निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाती है। भुगतान संतुलन और चालू खाते के घाटे पर संभावित असर को देखते हुए सोने के आयात पर नीति निर्माता लगातार नजर रखते हैं।
With inputs from IANS