कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने की तैयारी, आयात पर निर्भरता घटेगी और 53 हजार से ज्यादा रोजगार बनेंगेBy Admin Tue, 11 August 2026 01:14 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम (CMAS) का उद्देश्य देश में कंटेनरों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, खाली कंटेनरों के आयात पर निर्भरता कम करना और 53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 99,149 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। यह निवेश विभिन्न आकार के 51 कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और देश में कंटेनरों की खरीद से जुड़ा होगा।

योजना से करीब 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और कंटेनर निर्माण तथा इससे जुड़े क्षेत्रों में 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है। इस तरह कुल 53,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।

10,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित वित्तीय परिव्यय वाली CMAS का मकसद कंटेनर निर्माण के पूरे इकोसिस्टम में उत्पादन, निवेश और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना है। सरकार का मानना है कि इससे कंटेनर उद्योग से जुड़े कई सहायक क्षेत्रों को भी गति मिलेगी।

इनमें कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पादों का निर्माण शामिल है। यानी योजना का असर केवल कंटेनर बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े कई छोटे-बड़े उद्योगों में भी मांग और निवेश बढ़ सकता है।

सरकार ने कहा कि CMAS भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। घरेलू स्तर पर कंटेनर उत्पादन बढ़ने से आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने, रोजगार पैदा करने और वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह योजना सरकार की ‘मेक इन इंडिया’, ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स विकास से जुड़ी पहलों के अनुरूप भी है।

भारत के बढ़ते व्यापार और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के साथ देश में कंटेनरों की मांग लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) के अनुसार, मात्रा के आधार पर दुनिया के करीब 80 प्रतिशत माल का व्यापार समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में कंटेनर समुद्री आपूर्ति श्रृंखला का एक अहम हिस्सा हैं।

सरकार के मुताबिक, भारत हर साल घरेलू मांग और खाली कंटेनरों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने की जरूरत को पूरा करने के लिए करीब 20 लाख खाली कंटेनरों का आयात करता है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से इस निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने माल ढुलाई की दरों में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है और समुद्री परिवहन नेटवर्क पर दबाव डाला है। ऐसे माहौल में कई देश महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स परिसंपत्तियों, खासकर शिपिंग कंटेनरों के घरेलू उत्पादन को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

केंद्र सरकार ने इसके अलावा 70,000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की भी घोषणा की है। इसका उद्देश्य देश की जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करना और समुद्री विनिर्माण क्षेत्र में अधिक निवेश को आकर्षित करना है।

कंटेनर निर्माण और जहाज निर्माण में समानांतर रूप से निवेश बढ़ने से भारत की समुद्री लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने से लंबे समय में भारत के वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत भूमिका निभाने की क्षमता भी बढ़ सकती है।
 

 

With inputs from IANS