जुलाई में रिकॉर्ड निर्यात से भारतीय कारोबारियों की मजबूती साबित: FIEOBy Admin Fri, 14 August 2026 11:35 AM

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वैश्विक स्तर पर जारी सप्लाई चेन की चुनौतियों के बावजूद जुलाई 2026 में भारत के वस्तु निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने इसे भारतीय निर्यातकों की मजबूती, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बदलते वैश्विक कारोबारी माहौल के अनुसार तेजी से खुद को ढालने की क्षमता का प्रमाण बताया है।

जुलाई में भारत का वस्तु निर्यात 19 प्रतिशत बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो किसी भी जुलाई महीने में अब तक का सबसे अधिक निर्यात है। FIEO के अध्यक्ष एससी रहलान ने इस उपलब्धि को भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए उत्साहजनक संकेत बताया।

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान वस्तु निर्यात 17.04 प्रतिशत बढ़कर 173.78 अरब डॉलर हो गया। इसी अवधि में वस्तु और सेवाओं को मिलाकर भारत का कुल निर्यात 13.16 प्रतिशत बढ़कर 316.42 अरब डॉलर पहुंच गया।

रहलान ने कहा कि गैर-पेट्रोलियम निर्यात में 12.79 प्रतिशत की वृद्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि निर्यात में तेजी केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि विनिर्माण और वैल्यू-एडेड उत्पादों समेत अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों से इसे समर्थन मिल रहा है।

इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और कपड़ा समेत कई विनिर्माण क्षेत्रों ने निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। FIEO के अनुसार, आगे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने से निर्यात वृद्धि का लाभ रोजगार सृजन और व्यापक आर्थिक विकास में बदला जा सकता है।

निर्यात बाजारों में भी भारतीय कंपनियां लगातार विविधता ला रही हैं। अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन जैसे प्रमुख बाजारों में मांग के बीच भारत के उत्पादों की मौजूदगी बनी हुई है। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, अफ्रीका और अन्य उभरते बाजारों में भारतीय निर्यात का विस्तार यह दर्शाता है कि कंपनियां किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

अप्रैल-जुलाई अवधि में अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, चीन, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और तंजानिया भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में शामिल रहे।

हालांकि, FIEO ने बढ़ते आयात बिल और व्यापार घाटे को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत भी बताई है। अप्रैल-जुलाई के दौरान वस्तु आयात 19.27 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वस्तु निर्यात की वृद्धि दर 17.04 प्रतिशत रही। इससे व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

रहलान के अनुसार, ऊर्जा, पूंजीगत वस्तुओं और औद्योगिक मध्यवर्ती उत्पादों का अधिक आयात घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत भी हो सकता है। फिर भी, महत्वपूर्ण कच्चे माल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य ऐसे उत्पादों के घरेलू उत्पादन को मजबूत करना जरूरी है, जिनके लिए भारत फिलहाल काफी हद तक आयात पर निर्भर है।

FIEO ने निर्यात की मौजूदा गति को बनाए रखने के लिए ऐसी व्यापार नीति की जरूरत पर जोर दिया है, जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया कर सके। इसके साथ ही निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज, आसान कार्यशील पूंजी, तेज व्यापार सुविधा और बेहतर शिपिंग एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई है।

उद्योग जगत का मानना है कि यदि निर्यात वृद्धि को मजबूत घरेलू विनिर्माण, बेहतर लॉजिस्टिक्स और MSME क्षेत्र के विस्तार से जोड़ा जाता है, तो भारत न केवल वैश्विक बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है, बल्कि निर्यात को रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा आधार भी बना सकता है।

 

With inputs from IANS