चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार सख्त, थोक खरीदारों के लिए 15 दिन की स्टॉक सीमाBy IANS Thu, 20 August 2026 11:45 AM

Photo: IANS

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है। यह कदम बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नया नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।

आदेश के तहत ऐसे थोक उपभोक्ता जो हर महीने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उत्पादन, प्रसंस्करण या अन्य उपयोग के लिए इस्तेमाल करते हैं, वे अपने औसत मासिक उपभोग के 15 दिनों से अधिक का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे।

सरकार ने थोक उपभोक्ताओं की श्रेणी में मिठाई और कन्फेक्शनरी बनाने वाली इकाइयों, शीतल पेय निर्माताओं, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, मिठाई विक्रेताओं और अन्य संस्थागत खरीदारों को शामिल किया है। इसमें वे संस्थान आएंगे जिन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान, मौजूदा महीने को छोड़कर, औसतन हर महीने कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी की खपत की है।

हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के संस्थानों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन तथा स्थानीय निकायों को इस स्टॉक सीमा से छूट दी गई है।

सरकार चीनी मिलों द्वारा थोक उपभोक्ताओं को सीधे या डीलरों के माध्यम से बेची जाने वाली चीनी की मासिक मात्रा पर भी नजर रखेगी। किसी उपभोक्ता की चीनी खपत का आकलन विक्रेता या खरीदार की ओर से दाखिल किए गए GST रिटर्न में चीनी के संबंधित HSN कोड के आधार पर किया जाएगा।

इससे पहले सरकार ने डीलरों को भी चीनी का 30 दिनों से अधिक का स्टॉक नहीं रखने का निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना था। हालांकि, इस कदम के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी के दाम में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई, जो एक साल पहले के 46.34 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक है।

सरकार का नया फैसला ऐसे समय आया है जब त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना है। मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में इस अवधि के दौरान चीनी की खपत आम तौर पर बढ़ जाती है। ऐसे में सीमित अवधि के लिए स्टॉक नियंत्रण का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में और तेज उछाल को रोकना है।