सोने-चांदी में बड़ी तेजी की संभावना, डॉलर और ब्याज दरों के बदलते रुख से बनेगा नया माहौलBy IANS Sat, 22 August 2026 02:13 PM

Photo: IANS

सोने और चांदी की कीमतों में आने वाले समय में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की राजकोषीय स्थिति, वास्तविक ब्याज दरों में बदलाव और डॉलर के कमजोर पड़ने की संभावनाएं कीमती धातुओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रही हैं।

वल्लम कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में सोने की कीमतों में आई गिरावट को निवेश की मूल कहानी के कमजोर होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट ने मुख्य रूप से निवेशकों के बीच स्वामित्व और पोजिशनिंग को दोबारा व्यवस्थित किया है, जबकि कीमती धातुओं में निवेश का दीर्घकालिक आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है।

रिपोर्ट में 2 प्रतिशत की वास्तविक ब्याज दर का स्तर और डॉलर इंडेक्स में बदलाव को महत्वपूर्ण संकेतक बताया गया है। इसके मुताबिक, यदि वास्तविक ब्याज दरों में लगातार कमजोरी आती है और डॉलर का रुख बदलता है, तो यह महज बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक बदलाव का संकेत हो सकता है।

 

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वल्लम कैपिटल ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सामने नीतिगत स्तर पर मुश्किल स्थिति है। ब्याज दरें बढ़ाने से करीब 9.2 लाख करोड़ डॉलर के कर्ज के रोलओवर की लागत बढ़ेगी, जबकि दरों को मौजूदा स्तर पर रखने से महंगाई लक्ष्य से ऊपर रहने की स्थिति में वास्तविक ब्याज दरें नकारात्मक बनी रह सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ही परिस्थितियां अंततः अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे माहौल में सोने को पारंपरिक तौर पर मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ सुरक्षा देने वाली संपत्ति माना जाता है।

केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीद भी इस रुझान को मजबूत कर रही है। 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों ने 288.9 टन सोना खरीदा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 411 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, इसी अवधि में पश्चिमी देशों के गोल्ड ईटीएफ से 44.8 टन की निकासी हुई और आभूषणों की मांग में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

चांदी को लेकर रिपोर्ट में और अधिक तेजी की संभावना जताई गई है। इसमें कहा गया है कि जिन बाजार चक्रों में सोने ने लगातार और मजबूत तेजी दिखाई है, उनमें चांदी ने अक्सर सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है।

2021 से 2026 के मौजूदा चक्र में चांदी करीब 263 प्रतिशत बढ़ चुकी है, जबकि सोने में लगभग 164 प्रतिशत की तेजी आई है। यानी इस अवधि में चांदी ने सोने से करीब 99 प्रतिशत अंक बेहतर प्रदर्शन किया। हालांकि, सोने की तुलना में चांदी का अनुपात अभी करीब 69 गुना है, जबकि इसका दीर्घकालिक औसत लगभग 45 से 50 गुना के बीच रहा है। यह अंतर बताता है कि दोनों धातुओं के बीच मूल्यांकन को लेकर बाजार में अभी भी बदलाव की गुंजाइश हो सकती है।

रिपोर्ट में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद के लिए केविन वॉर्च के नामांकन के बाद सोने में आई 25-30 प्रतिशत की गिरावट का भी उल्लेख किया गया। इससे उस साल के नए निवेश प्रवाह के मार्क-टू-मार्केट मूल्य में करीब 23,000-28,000 करोड़ रुपये की कमी आई। हालांकि, बाद में सोने की कीमत लगभग 4,196 डॉलर से बढ़कर करीब 4,359 डॉलर तक पहुंच गई।

यह उतार-चढ़ाव इस बात को भी रेखांकित करता है कि सोने में निवेश लंबी अवधि के नजरिए से किया जाता है और कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद ईटीएफ तथा गोल्ड फंड जैसे साधन खुदरा निवेशकों के लिए कीमती धातु में निवेश का प्रमुख माध्यम बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग, संभावित रूप से कमजोर डॉलर और वास्तविक ब्याज दरों में बदलाव जैसे कारक सोने के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। वहीं, औद्योगिक उपयोग और पिछले चक्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण चांदी में तेजी की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। हालांकि, कीमती धातुओं की कीमतें वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर और आर्थिक नीतियों में बदलाव से प्रभावित होती हैं, इसलिए निवेशकों के लिए जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी होगा।