मानसून में सुधार से खरीफ फसल पर संकट टला, लेकिन बारिश के वितरण पर अभी नजर जरूरीBy IANS Mon, 24 August 2026 01:21 PM

Photo: IANS

देश में मानसून की स्थिति में पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे खरीफ फसलों के उत्पादन पर मंडरा रहा व्यापक संकट कम हुआ है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त तक देश में संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई, जबकि जून में यह कमी करीब 35 प्रतिशत थी। मैक्वायरी ने कहा कि स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि अभी इसे पूरी तरह सामान्य नहीं कहा जा सकता।

मानसून में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी दिखाई दे रहा है। सीजन की शुरुआत कमजोर रहने के बाद बुवाई में काफी तेजी आई है। 14 अगस्त तक देश में कुल खरीफ फसल क्षेत्र पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले केवल 2 प्रतिशत कम था। जून के अंत में यह अंतर करीब 21 प्रतिशत था।

हालांकि कुछ प्रमुख फसलों की बुवाई अभी भी पिछले वर्ष के स्तर से पीछे है। धान का रकबा 3.7 प्रतिशत और मक्का का रकबा करीब 4 प्रतिशत कम है। दूसरी ओर, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास की बुवाई पिछले साल के स्तर के लगभग बराबर पहुंच चुकी है और इनमें अंतर करीब 1 प्रतिशत के भीतर है।

मैक्वायरी के मुताबिक, बुवाई में बची हुई कमी अब व्यापक नहीं है, बल्कि कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है। इससे खरीफ उत्पादन को लेकर शुरुआती आशंकाएं काफी हद तक कम हुई हैं।

जलाशयों में पर्याप्त पानी का भंडार भी किसानों के लिए राहत की बात है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों का भंडारण स्तर 10 साल के औसत से ऊपर या उसके आसपास बना हुआ है। वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80 से 100 प्रतिशत है।

हालांकि बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई गई है। इन क्षेत्रों में बारिश का वितरण और आगे की मानसूनी गतिविधियां खरीफ फसल के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून में सुधार, खरीफ बुवाई में सीमित कमी और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल भंडार ने मिलकर फसल उत्पादन में बड़ी गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है।

इसका असर खाद्य महंगाई पर भी पड़ सकता है। बेहतर बारिश और फसल उत्पादन की संभावनाओं से खाद्य आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं कम हो सकती हैं, जिससे जून के मुकाबले खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव घटने की उम्मीद है।

हालांकि, मानसून के अंतिम चरण में बारिश का क्षेत्रीय वितरण अभी भी महत्वपूर्ण रहेगा। कुल बारिश का आंकड़ा बेहतर होने के बावजूद यदि किसी प्रमुख कृषि क्षेत्र में लंबे समय तक बारिश की कमी रहती है, तो स्थानीय स्तर पर फसल और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

 

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