रक्षाबंधन पर 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद, राखी बाजार में जबरदस्त रौनकBy IANS Tue, 25 August 2026 04:48 PM

Photo: IANS

रक्षाबंधन से पहले देशभर के बाजारों में खरीदारी ने जोर पकड़ लिया है। व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के मुताबिक, इस साल रक्षाबंधन से जुड़े कारोबार का आंकड़ा 30,000 करोड़ रुपये को पार कर सकता है। त्योहार में अब केवल चार दिन बाकी हैं और दिल्ली समेत देश के प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है।

CAIT के राष्ट्रीय महासचिव और चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, अकेले राखी का कारोबार करीब 25,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। दिल्ली में ही राखी से जुड़े कारोबार का आंकड़ा लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली और लक्ष्मी नगर जैसे प्रमुख बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोग राखी के साथ भाई-बहनों के लिए उपहार और त्योहार से जुड़ी अन्य जरूरी चीजों की खरीदारी कर रहे हैं।

CAIT का कहना है कि रक्षाबंधन का आर्थिक असर सिर्फ राखी की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, कपड़े, उपहार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावटी सामान, सूखे मेवे, पूजा सामग्री और अन्य त्योहार संबंधी वस्तुओं की खरीदारी को जोड़ने पर कुल कारोबार 30,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।

इस बार बाजार में पारंपरिक राखियों के साथ थीम आधारित और स्थानीय स्तर पर तैयार की गई राखियों की भी मांग बढ़ी है। इनमें विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों से जुड़ी राखियां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

बाजार में ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृत काल राखी’ जैसे डिजाइन उपलब्ध हैं।

खंडेलवाल के मुताबिक, बच्चों और युवाओं में ब्रह्मोस, राष्ट्र रक्षा सूत्र और विकसित भारत राखियों को लेकर विशेष उत्साह है। वहीं महिलाओं के बीच नारी वंदन और लखपति दीदी थीम वाली राखियां पसंद की जा रही हैं। इन डिजाइनों के जरिए महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता जैसे संदेशों को भी त्योहार से जोड़ा जा रहा है।

स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों के लिए भी यह त्योहारी सीजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में बनी राखियों की बढ़ती मांग से महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय कारीगरों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है।

CAIT के अनुसार, रक्षाबंधन अब केवल भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं रह गया है। इसके साथ स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, स्वदेशी कारोबार, महिला उद्यमिता, पर्यावरण जागरूकता और आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दे भी तेजी से जुड़ रहे हैं। इससे त्योहार के दौरान होने वाली खरीदारी का लाभ छोटे कारोबारियों और स्थानीय उत्पादकों तक पहुंचने की संभावना बढ़ी है।
 

ADVERTISEMENT
Advertisement