सेंसेक्स और निफ्टी में लौटी तेजी, बैंकिंग शेयरों के सहारे तीन दिन की गिरावट थमीBy IANS Thu, 10 September 2026 04:47 PM

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भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी ने गुरुवार को लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत चढ़कर 23,477.80 पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीकी स्तर पर निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख दैनिक मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे निकट अवधि में बाजार की स्थिति पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा सकती। निफ्टी के लिए 23,400 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि इसके नीचे 23,300 अगला महत्वपूर्ण स्तर है। दूसरी ओर, 23,550-23,600 का क्षेत्र शुरुआती प्रमुख प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में रहे।

हालांकि व्यापक बाजार में तेजी का उत्साह सीमित रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.38 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। इससे संकेत मिलता है कि गुरुवार की रिकवरी मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े शेयरों और वित्तीय क्षेत्र तक सीमित रही।

क्षेत्रीय सूचकांकों में वित्तीय शेयरों का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक प्रमुख बढ़त वाले सूचकांकों में शामिल रहे। इसके विपरीत, निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख सेक्टरों में रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में रिकवरी देखने को मिली। निवेशक तेल बाजार में होने वाले घटनाक्रम और इसके भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई तथा कंपनियों की कमाई पर संभावित असर पर नजर बनाए हुए हैं।

गुरुवार का कारोबार एक्सपायरी के दिन भी उतार-चढ़ाव भरा रहा और कमजोर एशियाई संकेतों ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा। हालांकि अगस्त में इक्विटी फंड में मजबूत प्रवाह और एसआईपी बंद होने की दर में कमी ने बाजार को कुछ समर्थन दिया।

दूसरी ओर, रुपये में कमजोरी और घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। ऐसे में बाजार में तेजी लौटने के बावजूद विशेषज्ञ निकट अवधि में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।