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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत को वैश्विक आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बताते हुए कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह प्रदर्शन आईएमएफ के अनुमान और अन्य अर्थशास्त्रियों के आम सहमति वाले पूर्वानुमान से बेहतर रहा।
आईएमएफ के संचार विभाग की निदेशक जूली कोजाक ने गुरुवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत की वास्तविक जीडीपी दूसरी तिमाही में 7.8 प्रतिशत बढ़ी। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि आईएमएफ के कर्मचारियों के अनुमान के साथ-साथ अन्य पर्यवेक्षकों के अनुमान से भी अधिक रही।
कोजाक के मुताबिक, उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में मजबूत गतिविधियां और निर्यात में अपेक्षा से अधिक वृद्धि रही। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा कीमतों में आए झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती और लचीलापन दिखाया है।
उन्होंने कहा, “यह परिणाम ऊर्जा कीमतों के झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाता है।”
कोजाक ने आगे कहा कि आईएमएफ लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि भारत दुनिया के लिए विकास का एक प्रमुख इंजन बना हुआ है।
उनकी यह टिप्पणी भारत के ताजा आर्थिक आंकड़ों, मैक्रोइकोनॉमिक डेटा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के एक बड़े ऊर्जा आयातक देश पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़े सवालों के जवाब में आई।
भारत के नए जीडीपी आंकड़ों पर बात करते हुए कोजाक ने कहा कि हालिया आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन का नया सूचकांक और उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला शामिल की गई है। उनके मुताबिक, इन बदलावों से भारत के सकल घरेलू उत्पाद के अनुमान को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आईएमएफ भारत की ओर से मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों को आधुनिक बनाने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत करता है और अधिकारियों को सांख्यिकीय ढांचे तथा डेटा की गुणवत्ता को लगातार मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
हालांकि, आईएमएफ ने बढ़ती तेल कीमतों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव की निगरानी जारी रखने की बात कही है। कोजाक ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि सभी तेल आयातक देशों पर दबाव डालती है।
उन्होंने बताया कि महंगे तेल से ऊर्जा आयातक देशों के भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है और राजकोषीय स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। इसका प्रभाव संबंधित देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त की संरचना पर निर्भर करता है।
कोजाक ने कहा कि कई तेल आयातक देशों ने इस तरह के बाहरी झटके के प्रभाव को सीमित करने के लिए कदम उठाए हैं। भारत के मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊर्जा कीमतों का झटका ऐसे समय आया है जब देश की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में मजबूत है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक स्थिति एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में काम कर रही है और देश ने ऊर्जा कीमतों के झटके के प्रति काफी लचीलापन दिखाया है।
आईएमएफ भारत के लिए अपने नए आर्थिक विकास अनुमान अक्टूबर में जारी होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में पेश करेगा। तब तक फंड का आकलन है कि भारत ने ऊर्जा कीमतों में आए झटके का काफी मजबूती से सामना किया है।
प्रेस ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि आईएमएफ के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर नाइजल क्लार्क इस सप्ताह भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में प्रमुख नीति-निर्माताओं तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की हैं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश के आयात बिल, चालू खाते और सरकारी वित्त पर पड़ सकता है। भारत अपनी घरेलू खपत की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है।