
भारत का वेल्थ मैनेजमेंट सेक्टर अगले आठ वर्षों में करीब ढाई गुना बढ़कर 2034 तक 436 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वित्तीय परिसंपत्तियों की बढ़ती हिस्सेदारी, वैश्विक निवेश के प्रति बढ़ती रुचि और पेशेवर वित्तीय सलाह की मांग में इजाफा इस क्षेत्र के विस्तार के प्रमुख कारण बन सकते हैं। यह जानकारी एमके वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में निवेशकों की जरूरतें अब केवल म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार तक सीमित नहीं रह गई हैं। निवेशक म्यूचुअल फंड, इक्विटी, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS), अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF), प्राइवेट क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स और वैश्विक परिसंपत्तियों के साथ-साथ टैक्स, उत्तराधिकार और एस्टेट प्लानिंग के लिए भी एकीकृत सलाह चाहते हैं।
अब तक इस बाजार में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) की हिस्सेदारी करीब 62.8 प्रतिशत होने का अनुमान है। हालांकि, वेल्थ मैनेजमेंट की मांग अब मास-अफ्लुएंट, अफ्लुएंट, अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (UHNI), फैमिली ऑफिस और संस्थागत निवेशकों के बीच भी तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज और वैकल्पिक निवेश विकल्पों की भूमिका बढ़ रही है। निवेशक पोर्टफोलियो में विविधता लाने और अलग-अलग तरह के रिटर्न के अवसर तलाशने के लिए AIF, प्राइवेट क्रेडिट, प्री-IPO निवेश और स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
फैमिली ऑफिस की भूमिका भी पारंपरिक निवेश प्रबंधन से आगे बढ़ रही है। अब इनमें कॉरपोरेट गवर्नेंस, उत्तराधिकार की योजना, परोपकार और अगली पीढ़ी को संपत्ति हस्तांतरित करने जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
एमके वेल्थ मैनेजमेंट के सीईओ पराग मोरे ने कहा कि भारत ऐसे दौर में पहुंच रहा है जहां तेजी से बढ़ रही संपत्ति के साथ उसे व्यवस्थित तरीके से संभालने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वित्तीय परिसंपत्तियां घरेलू संपत्ति का बड़ा हिस्सा बन रही हैं और ऐसे में ग्राहक अलग-अलग उत्पादों के बजाय संपत्ति के निर्माण, संरक्षण और हस्तांतरण के लिए एकीकृत रणनीति चाहते हैं।
मोरे के मुताबिक, भविष्य के वेल्थ मैनेजरों के लिए केवल निवेश विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं होगी। उन्हें तकनीक, पारदर्शिता और ग्राहक के परिवार तथा उसके दीर्घकालिक लक्ष्यों की बेहतर समझ को भी अपनी सेवाओं का हिस्सा बनाना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवार धीरे-धीरे अपनी बचत का एक हिस्सा भौतिक संपत्तियों और पारंपरिक बैंक जमा से निकालकर म्यूचुअल फंड, इक्विटी और पेशेवर रूप से प्रबंधित वित्तीय उत्पादों की ओर ले जा रहे हैं। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश की बढ़ती लोकप्रियता ने भी अधिक लोगों को वित्तीय बाजारों से जोड़ा है।
म्यूचुअल फंड उद्योग इस बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में उद्योग का तिमाही औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 77.98 लाख करोड़ रुपये रहा।
रिपोर्ट ने भारत की आर्थिक वृद्धि को भी संपत्ति निर्माण के लिए अनुकूल बताया है। इसमें पूरे वित्त वर्ष के लिए GDP वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत और पहली तिमाही की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया गया है।
हालांकि, फिक्स्ड इनकम निवेश के मामले में रिपोर्ट ने लंबी अवधि वाले बॉन्ड और यील्ड कर्व के ऊपरी हिस्से को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। घरेलू 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड करीब 6.80 प्रतिशत रहने के बीच रिपोर्ट का अनुमान है कि इसमें बड़ी गिरावट की गुंजाइश सीमित हो सकती है और यील्ड 7.10 प्रतिशत की ओर बढ़ सकती है।
ऐसे माहौल में रिपोर्ट के अनुसार निवेशकों की प्राथमिकता लंबी अवधि के ब्याज दर जोखिम लेने के बजाय नियमित आय देने वाली और बेहतर क्रेडिट गुणवत्ता वाली रणनीतियों की ओर बढ़ सकती है।