कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और FII प्रवाह तय करेंगे शेयर बाजार की दिशाBy IANS Sun, 27 September 2026 12:54 PM

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भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। ऐसे में आने वाले सप्ताह में बाजार की चाल मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका से आने वाले प्रमुख आर्थिक आंकड़ों से प्रभावित हो सकती है।

पिछले सप्ताह ज्यादातर समय बाजार का रुख कमजोर रहा और शुरुआती कारोबारी सत्रों में प्रमुख सूचकांक सीमित दायरे में बने रहे। हालांकि, गुरुवार को हुई तेज बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके बाद शुक्रवार को चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी लौटने से बाजार को कुछ सहारा मिला।

शुक्रवार को सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 73,895.74 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140.50 पर रहा। हालिया गिरावट के बाद कुछ बड़े शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन पर निवेशकों ने बैंकिंग, तेल एवं गैस तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की।

आने वाले सप्ताह में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे अहम संकेतकों में बनी रह सकती है। ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने से महंगाई, आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि, हाल में तेल की कीमतों में कुछ नरमी से निवेशकों को राहत मिली है।

बाजार की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों में आगे होने वाले उतार-चढ़ाव पर रहेगी। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के बाजार पर भी पड़ सकता है।

वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी निवेशकों के रडार पर रहेगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया नीतिगत फैसले के बाद यील्ड और डॉलर की दिशा बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगी। ऊंची बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी को बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, यील्ड में नरमी से इक्विटी बाजारों को कुछ समर्थन मिल सकता है।

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव से जुड़े घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य जहाजरानी गतिविधियों को बहाल करने के लिए सात दिन के एक प्रस्तावित ढांचे की पेशकश की है, जिसके बदले प्रतिबंधों में ढील और व्यापक युद्धविराम जैसे कदमों की बात कही गई है।

यदि तनाव कम करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है तो इससे ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आने की संभावना बन सकती है। वहीं तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। पिछले कुछ सप्ताह से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजार पर दबाव बनाया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की मजबूत भागीदारी और कई शेयरों में आई गिरावट के बाद निचले स्तर पर खरीदारी से बीच-बीच में बाजार को सहारा मिल सकता है।

बाजार में टिकाऊ सुधार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और विदेशी पूंजी की निकासी में गिरावट जैसे कारक अहम होंगे।

इसके अलावा, अगले सप्ताह अमेरिका के कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने हैं। इन आंकड़ों से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति, महंगाई के रुझान और ब्याज दरों को लेकर आगे की संभावित दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। अमेरिकी आंकड़ों का असर वैश्विक निवेश धारणा और दुनिया भर के शेयर बाजारों में पूंजी के प्रवाह पर भी पड़ सकता है।