महंगे कच्चे तेल के दबाव में Sensex-Nifty लगातार दूसरे दिन फिसलेBy IANS Tue, 29 September 2026 04:21 PM

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भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। महंगे कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

Sensex 242.65 अंक यानी 0.33 फीसदी फिसलकर 72,529.07 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 64.05 अंक यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 22,716.20 पर रहा। कारोबारी सत्र के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और Nifty एक समय करीब 2.5 फीसदी तक नीचे चला गया था।

बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे। Nifty MidCap इंडेक्स 0.99 फीसदी और Nifty SmallCap इंडेक्स 0.81 फीसदी गिरकर बंद हुए।

क्षेत्रवार कारोबार में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, केमिकल्स, रियल्टी और IT शेयरों में दबाव देखने को मिला। Nifty पर Titan Company प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहा, जबकि Wipro और HCLTech समेत कई IT शेयरों पर भी बिकवाली का असर पड़ा।

इसके विपरीत, फार्मा शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। Nifty Pharma बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में शामिल रहा। बाजार में कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती के बावजूद व्यापक स्तर पर निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा।

विश्लेषकों के मुताबिक, Nifty के लिए 22,750-22,800 का स्तर तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है, जबकि 22,550-22,600 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। 22,500 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए खास चिंता का विषय बनी हुई हैं क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगा तेल मुद्रास्फीति, आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है। मंगलवार को Brent crude करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने भी निवेशकों की धारणा पर असर डाला। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए एक अतिरिक्त दबाव बनी हुई है। Reuters के अनुसार, सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से 2.17 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है।

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि निकट अवधि में भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित करते रह सकते हैं। इसके साथ ही निवेशकों का ध्यान अब कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजों पर भी बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा अस्थिर माहौल में निवेशक व्यापक बाजार के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति और बेहतर आय संभावनाओं वाली कंपनियों पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।

इस बीच, रुपये में कारोबार अपेक्षाकृत स्थिर रहा और यह करीब 95.97 प्रति डॉलर के आसपास रहा। विश्लेषकों के अनुसार, निकट अवधि में रुपये के लिए 95.65-96.15 का दायरा महत्वपूर्ण रह सकता है।