चार दिन की गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 473 अंक चढ़ाBy IANS Mon, 05 October 2026 04:27 PM

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भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को चार कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक बाजारों में मजबूती और निवेशकों के जोखिम लेने की धारणा में सुधार से घरेलू बाजार को सहारा मिला।

सेंसेक्स 472.77 अंक या 0.66 प्रतिशत बढ़कर 72,382.47 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 133.80 अंक या 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,555.75 पर रहा।

निफ्टी के तकनीकी परिदृश्य पर बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि सूचकांक ने 22,580-22,600 के स्तर पर अपने टूटे हुए साप्ताहिक 200-SMA क्षेत्र को फिर से परखा, लेकिन इसके नीचे बंद हुआ।

विश्लेषकों के अनुसार, 22,600 के ऊपर लगातार टिकने पर निफ्टी की रिकवरी 22,800 तक बढ़ सकती है, जबकि इस स्तर से अस्वीकृति मिलने पर 22,400 तत्काल सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है।

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि व्यापक भागीदारी के साथ निफ्टी के 22,600 के ऊपर बंद होने और बैंक निफ्टी के 55,175 के स्तर को पार करने पर तेजी आगे बढ़ सकती है। इसके विपरीत, इन स्तरों को पार करने में विफलता, खासकर कच्चे तेल में फिर से तेजी या भारतीय रिजर्व बैंक के अपेक्षाकृत सख्त रुख की स्थिति में, बाजार में बिकवाली का दबाव वापस ला सकती है।

वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी से भी घरेलू बाजार की धारणा को समर्थन मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की राह पर आगे बढ़ने की जरूरत नहीं पड़ सकती, जिससे हाल के सत्रों में इक्विटी बाजारों पर बना दबाव कुछ कम हुआ।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में ITC, BSE और Tata Motors Passenger Vehicles सबसे अधिक बढ़ने वाले शेयरों में रहे और बाजार की रिकवरी में योगदान दिया।

व्यापक बाजार में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 0.47 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ।

क्षेत्रीय स्तर पर कंज्यूमर से जुड़े शेयरों में अधिक खरीदारी देखी गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी FMCG सूचकांकों ने व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया।

इसके विपरीत, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े शेयरों पर दबाव रहा। निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा सत्र के दौरान सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रीय सूचकांकों में रहे।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयर बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण स्तर पर है और इसमें रिकवरी की संभावना बनी हुई है। हालांकि, मौजूदा जोखिम से बचने की धारणा के कारण निवेशक किसी नए सकारात्मक संकेत के अभाव में मुनाफावसूली कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी कि वे आय की संभावनाओं और कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान दें तथा तेजी का पीछा करने के बजाय गिरावट में चुनिंदा शेयरों में निवेश करें।

इस बीच, बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के फैसले से पहले रुपया कमजोर होकर करीब 96.30 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता रहा।