भारतीय विनिर्माण क्षेत्र का भरोसा लौटा, उत्पादन और मांग में सुधार के संकेत: FICCIBy IANS Tue, 06 October 2026 05:45 PM

Photo: IANS

भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कारोबारी धारणा में सुधार देखने को मिला है। उत्पादन, मांग, निर्यात और रोजगार को लेकर कंपनियों का भरोसा बढ़ा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

FICCI के सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में करीब 95 प्रतिशत विनिर्माताओं ने उत्पादन में बढ़ोतरी या कम से कम स्थिरता की जानकारी दी। पहली तिमाही में ऐसे कंपनियों की हिस्सेदारी 77 प्रतिशत थी। यह सुधार इस बात का संकेत है कि औद्योगिक गतिविधियों में दूसरी तिमाही के दौरान गति बढ़ी।

मांग के मोर्चे पर भी तस्वीर बेहतर हुई है। करीब 90 प्रतिशत निर्माताओं ने अपने ऑर्डर बुक में बढ़ोतरी या स्थिरता की बात कही, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत था।

FICCI के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिर स्थिति ने उद्योग के कारोबारी भरोसे को सहारा दिया है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियां निकट अवधि में उत्पादन और मांग को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त नजर आ रही हैं।

विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग भी बढ़ा है। दूसरी तिमाही में औसत क्षमता उपयोग करीब 75 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले सर्वे में यह 72 प्रतिशत था। क्षमता उपयोग में बढ़ोतरी का अर्थ है कि कंपनियां अपनी मौजूदा उत्पादन सुविधाओं और मशीनरी का पहले की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर रही हैं।

हालांकि, अगले छह महीनों के लिए निवेश का परिदृश्य मोटे तौर पर स्थिर बना हुआ है। कंपनियों ने विस्तार और नए निवेश के रास्ते में कई चुनौतियों का भी उल्लेख किया है। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और व्यापार प्रतिबंध, मांग को लेकर अनिश्चितता, कुशल कर्मचारियों की कमी, कच्चे माल की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स लागत और नियामकीय अड़चनें प्रमुख हैं।

निर्यात को लेकर भी उद्योग का भरोसा मजबूत हुआ है। करीब 80 प्रतिशत कंपनियों ने एक साल पहले की तुलना में निर्यात में बढ़ोतरी या स्थिरता की जानकारी दी। पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था। FICCI ने कहा कि सरकार और उद्योग की ओर से निर्यात बाजारों में विविधता लाने के प्रयासों ने इस सुधार में योगदान दिया है।

रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। अगले तीन महीनों में 43 प्रतिशत विनिर्माताओं ने अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना बताई है। पिछली तिमाही में ऐसी कंपनियों की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन और मांग में सुधार का असर कंपनियों की मानव संसाधन जरूरतों पर भी पड़ रहा है।

क्षेत्रवार देखें तो ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग का विकास परिदृश्य सबसे मजबूत रहा। मशीन टूल्स और धातु उत्पाद क्षेत्र में भी मजबूत से मध्यम वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। वहीं, कैपिटल गुड्स, रसायन, ग्लास, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण और कपड़ा उद्योगों में मध्यम वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि, बढ़ती उत्पादन लागत उद्योग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। करीब 83 प्रतिशत कंपनियों ने बिक्री के अनुपात में उत्पादन लागत बढ़ने की जानकारी दी, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत था। इसका मतलब है कि उत्पादन और मांग में सुधार के बावजूद लागत का दबाव कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है।

वित्तपोषण की स्थिति फिलहाल अनुकूल बनी हुई है। करीब 90 प्रतिशत विनिर्माताओं ने बैंक से पर्याप्त वित्तीय सुविधा उपलब्ध होने की बात कही। हालांकि, कंपनियों द्वारा भुगतान की जाने वाली औसत ब्याज दर 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 9.1 प्रतिशत हो गई।

कुल मिलाकर, FICCI के आंकड़े भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में दूसरी तिमाही के दौरान व्यापक सुधार की ओर इशारा करते हैं। उत्पादन, ऑर्डर बुक, क्षमता उपयोग, निर्यात और रोजगार के संकेत सकारात्मक हुए हैं, लेकिन वैश्विक व्यापार तनाव और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां आने वाले महीनों में उद्योग की रफ्तार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रहेंगी।