अनिल अंबानी की रिलायंस पावर की 2,032 करोड़ रुपये की संपत्तियां ईडी ने की जब्तBy IANS Wed, 14 October 2026 06:19 PM

Photo: IANS

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की भारत में स्थित 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन से जुड़े मामले में की गई है। जांच एजेंसी ने बुधवार को जारी बयान में इसकी जानकारी दी।

ईडी की नई दिल्ली स्थित मुख्यालय जांच इकाई ने जिन संपत्तियों को जब्त किया है, उनमें रिलायंस पावर के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में कंपनी की हिस्सेदारी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है, जिसे कंपनी ने कथित तौर पर फेमा की धारा 4 का उल्लंघन करते हुए भारत के बाहर रखा था।

जांच की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली जानकारी के आधार पर हुई। इसमें रिलायंस पावर की लेखा पुस्तकों में 2,101.46 करोड़ रुपये के निवेश और अग्रिम भुगतान को बट्टे खाते में डालने का मामला सामने आया था। ये रकम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश और उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थीं।

ईडी ने इस मामले में इसी साल 6 से 8 मार्च के बीच फेमा के तहत तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान जांच एजेंसी ने कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जब्त किए तथा कई लोगों के बयान दर्ज किए।

2006 में जुटाए गए 300 मिलियन डॉलर की जांच

ईडी की जांच में सामने आया कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल), जिसका बाद में रिलायंस पावर में विलय हो गया, ने वर्ष 2006 में विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए थे। इसमें से 275 मिलियन डॉलर कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में निवेश किए गए।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरएनआरएल-एस ने यह रकम स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) एसए में जमा कराई थी। इस जमा राशि को ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण के लिए जमानत के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

ईडी का दावा है कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह द्वारा किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों के लिए काम करने वाले कुछ लोग समूह के निर्देशों के मुताबिक कार्य करते थे।

विदेश से भारत और फिर बाहर भेजे गए धन की भी जांच

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ऋण के जरिए प्राप्त रकम का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इसमें मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से कुछ समय के लिए धन को भारत वापस लाने और फिर उसे विदेश में रखने जैसी गतिविधियां भी शामिल थीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का लाभ रिलायंस अनिल अंबानी समूह को मिला।

जांच में यह भी पाया गया कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की कंपनियां डॉयचे बैंक से लिए गए ऋण चुकाने में विफल रहीं। ईडी के अनुसार, इसके बाद लेनदेन को वास्तविक कारोबारी गतिविधियों के रूप में पेश करने के लिए दस्तावेज तैयार किए गए।

एजेंसी का आरोप है कि इन दस्तावेजों में यह दिखाया गया कि आरएनआरएल-एस और रिलायंस पावर की इंडोनेशिया स्थित सहायक कंपनियों ने बीवीआई की कंपनियों को वास्तविक कारोबारी जरूरतों के लिए अग्रिम भुगतान किया था। हालांकि, जांच के दौरान ये दस्तावेज कथित तौर पर पिछली तारीखों में तैयार किए गए पाए गए, ताकि लेनदेन को वैध कारोबारी गतिविधियों के रूप में दर्शाया जा सके।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। जब्त की गई संपत्तियों की कार्रवाई फेमा के तहत की गई है।