सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया, डीजल पर घटायाBy IANS Fri, 16 October 2026 01:41 PM

Photo: IANS

केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल के निर्यात पर शुल्क घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, नई दरें शुक्रवार, 16 अक्टूबर से प्रभावी हो गई हैं।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क मौजूदा 0.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर शुल्क 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए हर पखवाड़े इन शुल्कों की समीक्षा करती है। हाल के महीनों में वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच निर्यात शुल्क में कई बदलाव किए गए हैं।

सितंबर में हुई पिछली समीक्षा के दौरान सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले शुल्कों में कटौती की थी। उस समय पेट्रोल पर शुल्क घटाकर 0.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था, जिसमें विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) शामिल था।

इससे पहले, 1 सितंबर से प्रभावी संशोधन में डीजल पर निर्यात शुल्क 3 रुपये से घटाकर 1 रुपये प्रति लीटर किया गया था। वहीं, डीजल पर विंडफॉल टैक्स 24 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।

अगस्त में सरकार ने पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर किया था। इसी दौरान डीजल पर कुल शुल्क 15.5 रुपये से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर निर्यात शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर किया गया था।

सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से रिफाइनरी कंपनियों को हुए असाधारण मुनाफे पर कर लगाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था।

इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सरकार ने इस कर को दोबारा लागू किया था। यह कदम ईंधन निर्यात से होने वाले असाधारण लाभ पर कर लगाने और घरेलू बाजार के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।