
झारखंड में नगर निगम चुनावों के करीब आने के साथ ही राजनीतिक और चुनावी माहौल गरमा रहा है। 23 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले नामांकन प्रक्रिया अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। 4 फरवरी नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है, जिसके चलते पूरे दिन झारखंड भर के जिला कलेक्ट्रेट में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की भारी भीड़ देखी गई।
मंगलवार को राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में नामांकन को लेकर काफी गहमागहमी रही। हालांकि ये चुनाव तकनीकी रूप से गैर-दलीय हैं, लेकिन हर स्तर पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की सक्रिय भागीदारी साफ तौर पर दिख रही है। कई जगहों पर अलग-अलग पार्टियों के वरिष्ठ नेता अपने समर्थित उम्मीदवारों के साथ नामांकन केंद्रों पर मौजूद दिखे।
रांची मेयर पद के लिए पूर्व मेयर रमा खलखो के नामांकन ने इस राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया। उनके नामांकन के दौरान कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बंधु तिर्की और आलोक दुबे समेत कई लोग मौजूद थे।
नामांकन दाखिल करने के बाद रमा खलखो ने कहा कि लोग नगर निगम क्षेत्र की मौजूदा स्थिति से खुश नहीं हैं और इस बार जनता बदलाव का फैसला कर सकती है। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि हालांकि चुनाव गैर-दलीय हैं, लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े उम्मीदवारों का समर्थन करना स्वाभाविक है।
नामांकन प्रक्रिया के दौरान समर्थकों द्वारा नारे लगाए गए और फूलों की मालाएं पहनाई गईं, जिससे पूरे परिसर में चुनावी माहौल बन गया। इस बार आरक्षण प्रणाली के कारण, कई पूर्व पार्षदों को अपनी सीटों में बदलाव करना पड़ रहा है, जबकि कुछ वार्डों में पुराने प्रतिनिधि एक-दूसरे के सामने चुनाव लड़ रहे हैं।
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इन चुनावों का एक खास पहलू महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। आरक्षित सीटों के अलावा, बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार सामान्य सीटों पर भी चुनाव लड़ रही हैं। इसी सिलसिले में, रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद रोशनी खलखो भी बुधवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी, और उम्मीद है कि उनका समर्थन करने के लिए कई वरिष्ठ बीजेपी नेता मौजूद रहेंगे।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 2 फरवरी तक सभी 48 शहरी स्थानीय निकायों में लगभग 1500 नामांकन पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख के बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर साफ हो जाएगी, जिससे शहर की सरकारों को चुनने के लिए मैदान में बचे कुल उम्मीदवारों की संख्या का पता चलेगा।