
रांची – झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता एक नाबालिग बच्ची से संबंधित हैबियस कॉर्पस याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य और केंद्र सरकार को लापता बच्चों की पहचान और खोज में आधार से जुड़े डेटा के उपयोग के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
यह याचिका बच्ची की मां ने अपनी बेटी की बरामदगी की मांग को लेकर दाखिल की है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति ए.के. राय की खंडपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों से जांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मां की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है।
अदालत के पूर्व आदेश का पालन करते हुए गुमला के डीएसपी और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने के प्रभारी अधिकारी खंडपीठ के समक्ष उपस्थित हुए और अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
अदालत को बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी संभावित सुराग जुटाने के लिए दिल्ली भी गई है। बच्ची की तस्वीर विभिन्न प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित और अपलोड की गई है, ताकि उसकी पहचान हो सके। हालांकि अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है और खोज अभियान जारी है।
खंडपीठ ने तकनीक के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के पास आधार से जुड़े डेटा के वैध उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए, साथ ही निजता के अधिकार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि लापता बच्चों से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच को प्रभावी बनाने के लिए एक मजबूत और स्पष्ट नीति ढांचा आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को जांच की आगे की प्रगति पर संतोषजनक और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि बाद में तय की जाएगी।
With inputs from IANS