आदिवासी जमीन पर बड़ा विवाद, CAG को लिखी चिट्ठी से झारखंड में बढ़ी हलचलBy Admin Sat, 21 March 2026 05:47 PM

रामगढ़: रामगढ़ से एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक मुद्दा सामने आया है, जिसने पूरे झारखंड में बहस छेड़ दी है। अनुभवी अधिवक्ता सह जीपी Sanjeev Kumar Ambastha ने शनिवार को प्रेस बयान जारी करते हुए आदिवासी भूमि मामलों की ऑडिट जांच पर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में महालेखाकार द्वारा आदिवासी जमीन के प्रबंधन और हस्तांतरण से जुड़े मामलों की ऑडिट की जा रही है, जो अब विवाद का रूप लेता जा रहा है। इस मामले में उन्होंने Comptroller and Auditor General of India को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी भूमि से जुड़े मामले Chotanagpur Tenancy Act, 1908 और Santhal Parganas Tenancy Act के तहत नियंत्रित होते हैं, जिनकी प्रकृति अर्द्ध-न्यायिक होती है। खास तौर पर सीएनटी एक्ट की धारा 49 और 71A के तहत लिए गए फैसलों की समीक्षा केवल सक्षम राजस्व प्राधिकरण ही कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों का ऑडिट महालेखाकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यह न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के समान होगा। साथ ही, ये “भूमि अनुदान” की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए 1971 के कानून के तहत इनकी ऑडिट संभव नहीं है।

पत्र के जरिए उन्होंने CAG से अनुरोध किया है कि झारखंड के महालेखाकार को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप से रोका जाए, ताकि कानून की मर्यादा और प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।