
जमशेदपुर। यात्री ट्रेन की विलंब से परिचालन से खफा विधायक सरयू राय ने मंगलवार को धरना दिया. इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठन और व्यापारियों ने सरयू राय के इस धरने का समर्थन दिया. धरने का दौरान प्रशासन के ओर से जीआरपीएफ और आरपीएफ बलों की तैनाती की गई थी. इस दौरान सरयू राय ने कहा कि अगर रेलवे ट्रेनों को समय पर नहीं चलाती है तो मजबूर होकर जनता को मालगाड़ी रोकनी पड़ेगी. यह लड़ाई बहुत जल्द 21 सदस्यों की समिति बनाकर लड़ी जाएगी. जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से मुलाकात करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि धरना देने की घोषणा उन्होंने अकेले की थी. लेकिन कई संगठनों ने उनके इस धरने का समर्थन दिया. क्योंकि आम आदमी से जुड़ा हुआ यह मुद्दा है. अब से रेलवे का यह मुद्दा सामूहिक प्रयास से हल किया जाएगा. उसमें सभी तबके के लोग होंगे. हमलोग मिल कर लड़ेंगे। सभी राजनीतिक दलों को भी हमने पत्र भेजा था कि इसमें शामिल हो. यह जनता का मामला है. हमलोग आगे इसका दायरा बढ़ाएंगे. दिल्ली भी जायेंगे. रेलवे बोर्ड के चैयरमैन और रेलमंत्री से भी बात करेंगे. आपस में आपकी सूचनाओं का लेनदेन चल रहा है, तो सभी को सभी की जानकारी है. किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. सरयू राय ने कहा कि टाटानगर आने-जाने वाली जितनी भी यात्री ट्रेनें हैं, उन्हें समय से चलाया जाए. ये रोजाना चार-पांच घंटे विलंब से पहुंच रही हैं. यह सिलसिला बीते तीन-साढ़े तीन साल से चल रहा है. लोग परेशान हो रहे हैं. पहले हमलोगों ने सोचा था कि इसका समाधान दो-चार दिनों में हो जाएगा लेकिन ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया के तर्ज पर ट्रेनों की लेटलतीफी गंभीर होती चली गई. सरयू राय ने कहा कि जब उन्होंने धरना का एलान किया, तब रोज कोई न कोई रेलवे अधिकारी मिलने आते थे. सांसद से उनकी बात हुई. आप लोग जो काम कर रहे हैं, उसमें 3 से 5 साल लगेंगे. क्या हम लोग इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करें? यह संभव नहीं. हमलोग इसमें सुधार चाहते हैं. सरयू राय ने आगे कहा कि कई व्यापारियों ने उन्हें बताया कि एक बार जब उनका माल ट्रेन में बुक हो जाता है तो यह रेलवे की जिम्मेदारी है कि वह उसे कैसे चलाए. अगर दो-चार घंटे की देरी भी हो जाती है तो व्यापारी को उससे बहुत दिक्कत नहीं है. उन्होंने डीआरएम से कहा कि अगर मालगाड़ियां थोड़ा विलंब से भी चलेंगी तो फैक्ट्री को बहुत नुकसान नहीं होगा लेकिन अगर यात्री ट्रेन समय से चली तो जनता को बहुत सुविधा हो जाएगी. लेकिन, ये रेल प्रशासन मानने को तैयार नहीं हैं. सरयू राय ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल में जो काम शुरु होने जा रहा है, वह अन्य रेल मंडलों में बहुत पहले शुरु होकर खत्म हो चुका है. इसका अर्थ यह निकला कि चक्रधरपुर रेल मंडल को उपेक्षित छोड़ दिया गया. जब जनता आवाज उठा रही है, तब इन्हें परेशानी महसूस हो रही है. अगर रेल प्रशासन समय पर पैसेंजर ट्रेनों को नहीं पहुंचा रहा है, तो इसका अर्थ यह हुआ कि आपकी नीयत में ही खोट है. इसका अर्थ यह भी हुआ कि सरकार को राजस्व मिले या ना मिले, रेल मंडल में कतिपय ऐसे अफसर हैं, जिन्हें अलग से राजस्व की प्राप्ति हो जाती है.