
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ झारखण्ड शाखा की वार्षिक आम बैठक मंगलवार को स्पीकर रवींद्र नाथ महतो की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई। बैठक मे कैसे संसदीय लोकतंत्र को और ज्यादा जनोपयोगी बनाया जाए इसपर व्यापक चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोकतंत्र को सिर्फ चुनावों तक ही सीमित नहीं रखा जाए बल्कि इसे जनभागीदारी का माध्यम बनाया जाए। उन्होनें कहा कि इस कार्य मे राष्ट्रमंडल संसदीय संघ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।यह मंच केवल एक औपचारिक बैठक का मंच नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन की प्रतिबद्धता तथा वैश्विक संसदीय परंपराओं के साथ हमारे गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की स्थापना वर्ष 1911 में हुई थी। उस समय इसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न विधायिकाओं के बीच संवाद स्थापित करना था, किंतु समय के साथ यह संगठन विकसित होकर एक वैश्विक लोकतांत्रिक मंच बन गया। आज सीपीए विश्व के 56 से अधिक देशों में फैले 180 से अधिक शाखाओं का एक विशाल नेटवर्क है।संयुक्त राष्ट्र के बाद यह विश्व का दूसरा सबसे व्यापक बहुपक्षीय मंच माना जाता है, जो संसदीय लोकतंत्र के क्षेत्र में कार्यरत है।
भारत और सीपीए : एक सशक्त सहभागिता
स्पीकर ने कहा कि भारत का सीपीए में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली रहा है। हमारे देश में सीपीए की कुल 33 शाखाएँ हैं—जिनमें संसद (लोकसभा और राज्यसभा) के साथ-साथ विभिन्न राज्यों की विधानसभाएँ भी शामिल हैं। इस दृष्टि से भारत, सीपीए के सबसे सक्रिय और सशक्त सदस्य देशों में से एक है। भारतीय सीपीए शाखा ने निरंतर यह सिद्ध किया है कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि एक जीवंत संस्कृति है।
झारखण्ड शाखा की भूमिका
सीपीए झारखण्ड शाखा ने भी अपने गठन के पश्चात निरंतर सक्रिय भूमिका निभाई है। हमने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भाग लेकर राज्य की पहचान को सशक्त किया है। हमारा प्रयास रहा है कि विधायकों को प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के अवसर मिले। अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को स्थानीय शासन में लागू किया जाए। जनहित से जुड़े मुद्दों को वैश्विक विमर्श में स्थान मिले। उन्होनें कहा कि हमें यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि अगला सीपीए सम्मेलन केप टाउन दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया जाएगा। यह हमारे लिए एक और अवसर होगा। भारत न केवल सीपीए का एक सदस्य है, बल्कि एक मार्गदर्शक राष्ट्र भी है। हम अपनी लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से अन्य देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।