
ज्ञान रंजन
रांची। देश मे पांच राज्यों मे विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। लगभग सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अभी इसी चुनाव मे लगा हुआ है। वहीं इस सबसे अलग झामुमो केंद्र की राजनीति मे अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद मे जुटा हुआ है। झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद असम विधानसभा चुनाव में हेमंत और कल्पना ने जमकर पसीना बहाया है। नतीजा जो भी हो लेकिन टी -ट्राइब्स बहुल विधानसभा क्षेत्रों मे हेमंत-कल्पना की जोड़ी कम समय मे ही लोगों के बीच पहचान कायम करने मे सफल रहे हैं। झामुमो राज्य स्तर से ऊपर उठने के लिए एक नए मिशन पर काम कर रहा है।
जानकारी के अनुसार झामुमो का अगला लक्ष्य दिल्ली है। लोकसभा मे झामुमो के तीन सांसद हैं और राज्यसभा मे अभी दो सदस्य हैं। 21 जून से पहले झारखंड मे राज्यसभा के लिए दो सीटों पर चुनाव होना है। एक सीट दिशोंम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद से ही खाली है और दूसरी सीट का कार्यकाल जिसपर भाजपा के दीपक प्रकाश काबिज है, 21 जून को पूरा हो जाएगा। झामुमो की तैयारी इस बार दोनों सीट अपने पास रखने की है। लेकिन झामुमो के इस योजना मे उसकी सहयोगी पार्टी काँग्रेस ही अड़ंगा लगाने पर उतारू है। काँग्रेस के मंसूबे को कैसे धवास्त किया जाए और कैसे काँग्रेस विधायकों का समर्थन लिया जाए इसपर झामुमो संजीदगी के साथ विचार कर रहा है।
कल्पना को आगे कर काँग्रेस पर दवाब बनाने की तैयारी
झारखंड मे राज्यसभा चुनाव मे जीत के लिए 28 मतों की जरूरत है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं। एक सीट झामुमो आसानी से निकाल सकता है। लेकिन दूसरी सीट निकालने के लिए झामुमो को और 22 विधायकों का समर्थन चाहिए। बिना काँग्रेस के समर्थन के यह आंकड़ा पूरा नहीं हो सकता है। दूसरी तरफ काँग्रेस पार्टी एक राज्यसभा सीट के लिए आवाज बुलंद किए हुए है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार झामुमो दूसरी सीट के लिए कल्पना सोरेन का नाम आगे करने पर विचार कर रहा है।
इसके पीछे झामुमो की सोच यह है कि यदि कल्पना सोरेन का नाम आगे कर दिया जाएगा तो काँग्रेस को पाले मे करने मे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं। आपसी सहमति से काम होता है तो आसानी से इंडिया गठबंधन दोनों सीट इस बार निकाल सकता है। गौरतलब है कि झारखंड मे हेमंत पार्ट 1 मे राज्यसभा के तीन चुनाव हुए थे। लेकिन उस समय आंकड़ा दोनों सीट निकालने का नहीं था। वर्ष 2020, 2022 और 2024 के राज्यसभा चुनाव मे भाजपा और झामुमो के एक-एक प्रत्याशी जीतकर राज्यसभा गए थे। हेमंत पार्ट 2 मे राज्यसभा का यह पहला चुनाव है। पिछले तीन चुनावों मे भी काँग्रेस ने एक सीट की दावेदारी की थी। वर्ष 2020 के राज्यसभा चुनाव मे काँग्रेस ने अपना प्रत्याशी भी दिया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी।
महुआ मांझी नहीं बना सकी झामुमो की पहचान
वर्ष 2022 के राज्यसभा चुनाव मे झामुमो ने महुआ मांझी को अपना प्रत्याशी बनाया था। पार्टी को उम्मीद थी कि महुआ मांझी राष्ट्रीय फलक पर झामुमो को पहचान दिलाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद पार्टी के अंदर आई वीरानी को कल्पना सोरेन ने पूरा किया था। लोकसभा चुनाव 2024 के समय हेमंत सोरेन जेल मे थे। उस चुनाव मे हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति मे कल्पना सोरेन ने वो कर दिखाया जो हेमंत सोरेन भी 2019 के लोकसभा चुनाव मे नहीं कर पाए थे।
कल्पना सोरेन ने अपने पहले राजनीतिक खेल मे लोकसभा के लिए जनजातीय आरक्षित सभी सीटों पर ऐसा खेला किया जिसके बारे मे भाजपा ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जनजातीय आरक्षित सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। यहाँ तक कि केंद्र सरकार मे जनजातीय मामले के मंत्री रहते हुए भी अर्जुन मुंडा की हार हुई थी। लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव मे भी कल्पना सोरेन ने अपने पति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ऐसा करिश्मा किया कि भाजपा को वर्ष 2019 के चुनाव परिणाम से भी पीछे धकेल दिया। ट्राइबल सीटों पर तो भाजपा को कहीं का नहीं रहने दिया। वर्ष 2024 से कल्पना सोरेन ने राजनीति मे तेजी के साथ जो मुकाम हासिल किया है उसका काट अबतक भाजपा को नहीं मिला है।
रांची मे हेमंत, दिल्ली मे कल्पना
जानकारी के अनुसार झामुमो कल्पना सोरेन को दिल्ली की राजनीति मे शिफ्ट करना चाहता है। इस पटकथा पर तो काम झामुमो की खेल गाँव मे सम्पन्न केन्द्रीय महासमिति की बैठक मे ही लिखी गई थी, लेकिन समय का इंतजार किया जा रहा था। बिहार चुनाव मे मिले धोखे के बाद से ही हेमंत सोरेन एक चतुर राजनीतिक खिलाड़ी की तरह काम कर रहे हैं। हेमंत सोरेन को यह पता है कि काँग्रेस इस स्थिति मे नहीं है कि उनकी सरकार को किसी तरह का नुकसान पहुंचा सके। बार-बार काँग्रेस की घुड़की के बाद भी हेमंत की तरफ से किसी भी तरह का राजनीतिक बयान नहीं दिया जा रहा है। बिहार मे मिले धोखे के बाद भी हेमंत सोरेन अपनी तरह से कुछ नहीं बोले थे। जो भी बयान आया है वह सरकार के मंत्री और पार्टी के पदाधिकारियों का आया था।
दूसरी तरफ काँग्रेस पार्टी मे विधायकों और मंत्रियों , विधायकों और संगठन चल रहे नेताओं के बीच बड़ी खाई बनी हुई है। हेमंत सोरेन इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे हैं। हेमंत परत 2 के दौरान की बार काँग्रेस मे टूट की बातें भी सामने आ चुकी है। ऐसे मे काँग्रेस राज्यसभा चुनाव मे कुछ इधर उधर करने के बारे मे सोचती भी है तो काँग्रेस के साथ कोई बड़ा खेल भी हो सकता है। कहा जा रहा है कि कल्पना को दिल्ली शिफ्ट करने के पीछे झामुमो की मंशा पार्टी की पहचान को राष्ट्रीय फलक पर ले जाना है।