
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी फाइल पर स्वीकृति प्रदान नहीं की. उन्होंने शुक्रवार को सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से सम्बंधित फ़ाइल सरकार को लौटा दी. राज्यपाल ने फाइल लौटाते हुए लिखा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के चर्चित अंजलि भारद्वाज मुकदमें के फैसले और आरटीआई एक्ट के प्रावधानों को देख ले। क्या उसके अनुरूप राज्य सरकार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नामों की अनुशंसा की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्यपाल ने फाइल के साथ विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा लोक भवन से की गयी शिकायत और पत्रों को भी संलग्न किया है। इस तरह राज्य में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर फंस गयी है। मालूम हो कि 13 अप्रैल को हाईकोर्ट में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति मामले में सुनवाई भी है।
25 मार्च को सीएम की अध्यक्षता में हुआ था नामों पर फैसला
उल्लेखनीय है कि 25 मार्च को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में सहमति बनाने के बाद सरकार ने लोकभवन को सूचना आयुक्तों के नामों का पैनल भेजा था। राज्यपाल की पैनल पर सहमति मिल जाने के बाद कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी करता। इसके बाद वर्ष 2020 से डिफंक्ट राज्य सूचना आयोग जीवित हो उठता। वहां लंबित हजारों मामलों की सुनवाई शुरू हो पाती। लेकिन अब एक बार फिर मामला अधर में फंस गया है। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के मामले में इस माह के अंत में सुनवाई होनी है। यहां उल्लेखनीय है कि सूचना आयुक्त पद के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुज कुमार सिन्हा, शिवपूजन पाठक, अमूल्य नीरज खलखो, तनुज खत्री का नाम सार्वजनिक होने के बाद कई संस्थाओं और व्यक्तियों ने लोक भवन से लिखित रूप से शिकायत की थी। उसमें सूचना अधिकार अधिनियम के अनुरूप सूचना आयुक्त पद पर नामों की अनुशंसा नहीं किए जाने की बात कही गयी है। सबसे अधिक शिकायत राजनीतिक दल से सीधे जुड़े लोगों के होने पर की गयी है।